अब बर्फ के नीचे भी नहीं खोएंगे जवान! सेना के लिए तैयार हो रही स्मार्ट वर्दी, हिमस्खलन में तुरंत मिलेगी लोकेशन
नई दिल्ली: बर्फीले और अत्यधिक दुर्गम क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा को नई तकनीक से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। रक्षा अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक ऐसी स्मार्ट वर्दी विकसित कर रहे हैं, जो हिमस्खलन, बर्फीले तूफान या ग्लेशियर जैसी आपात परिस्थितियों में जवान की सटीक लोकेशन का पता लगाने में मदद करेगी। इस तकनीक का उद्देश्य बचाव अभियानों को अधिक तेज, सटीक और प्रभावी बनाना है, ताकि संकट में फंसे सैनिकों तक कम समय में पहुंचा जा सके।
यह परियोजना रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की कानपुर स्थित डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट द्वारा सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी संस्थान के साथ संयुक्त अनुसंधान और प्रोटोटाइप तैयार करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। दोनों संस्थान मिलकर ऐसी स्मार्ट वर्दी विकसित करने में जुटे हैं, जो अत्यधिक ठंड और कठिन मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम कर सके।
वर्दी में ही होगी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक
प्रस्तावित स्मार्ट वर्दी में विशेष कंडक्टिव इंक की मदद से कपड़े पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जाएंगे। इन सर्किटों को जीपीएस मॉड्यूल, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक चिप और अन्य आवश्यक सेंसरों से जोड़ा जाएगा। पूरी तकनीक वर्दी के भीतर ही समाहित रहेगी, जिससे सैनिकों को अलग से भारी उपकरण लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी।
वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल, मोड़ने, पहनने और बार-बार धुलाई के बाद भी अपनी कार्यक्षमता बनाए रख सके।
हिमस्खलन में बचाव अभियान होगा अधिक प्रभावी
यदि किसी सैनिक के साथ हिमस्खलन, बर्फीले तूफान या ग्लेशियर क्षेत्र में कोई हादसा होता है और वह बर्फ के नीचे दब जाता है, तो वर्दी में लगी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली उसकी उपलब्ध या अंतिम लोकेशन का संकेत बचाव दल तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
इससे रेस्क्यू टीम को विशाल बर्फीले इलाके में अनुमान के आधार पर खोज करने के बजाय सीधे संभावित स्थान तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे बचाव अभियान की गति बढ़ेगी और जवान के सुरक्षित मिलने की संभावना भी अधिक हो सकती है।
कठिन इलाकों की चुनौती होगी कम
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खोज एवं बचाव अभियान अक्सर लंबा खिंच जाता है। कई मामलों में लापता या शहीद जवानों का पता लगाने में कई दिन लग जाते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में स्मार्ट वर्दी खोज अभियान को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है तथा बचाव कार्य में लगने वाला समय भी कम कर सकती है।
भविष्य में मिलेंगी स्वास्थ्य निगरानी की सुविधाएं
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल प्राथमिक लक्ष्य लोकेशन ट्रैकिंग आधारित स्मार्ट यूनिफॉर्म का सफल प्रोटोटाइप तैयार करना है। इसके बाद भविष्य में इसमें सैनिक के शरीर का तापमान, हृदय गति, शारीरिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
इससे कमांड सेंटर को वास्तविक समय में सैनिकों की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
सियाचिन और लद्दाख में बढ़ेगी सुरक्षा
सियाचिन, लद्दाख और अन्य ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए यह तकनीक भविष्य में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। यदि इसका परीक्षण और विकास सफल रहता है, तो यह न केवल खोज एवं बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सैन्य अभियानों की सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।





