तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने की बड़ी तैयारी, डीप सी एक्सप्लोरेशन के लिए 80,000 करोड़ रुपये का पैकेज ला सकती है सरकार

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नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं और तेल-गैस आपूर्ति को लेकर उभरी चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को प्रोत्साहित करने के लिए करीब 80,000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य विदेशी और घरेलू कंपनियों को डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन में निवेश के लिए आकर्षित करना है।

‘समुद्र मंथन’ मिशन के तहत होगी पहल

प्रस्तावित योजना ‘नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ यानी ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि गहरे समुद्र में तेल और गैस के नए भंडार खोजकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। इस योजना के तहत पहली बार खोजी परियोजनाओं की लागत में प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक मिल सकता है सहयोग

प्रस्ताव के अनुसार, डीपवॉटर क्षेत्रों में खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक सरकार रिइम्बर्समेंट के रूप में वहन कर सकती है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी विभिन्न मंत्रालयों के बीच विचाराधीन है और केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश होने से पहले इसमें बदलाव संभव है।

सरकार प्रत्येक खोजी कुएं के लिए वित्तीय सहायता की अधिकतम सीमा भी तय कर सकती है, ताकि परियोजनाओं की लागत पर नियंत्रण रखा जा सके। इसके अलावा 3डी भूकंपीय सर्वेक्षणों के लिए भी आंशिक वित्तीय सहायता दिए जाने पर विचार किया जा रहा है।

18 डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी जारी

सरकार ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम के तहत 18 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी भी कर रही है। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि तब तक प्रोत्साहन पैकेज का स्वरूप भी अंतिम रूप ले सकता है।

डीपवॉटर परियोजनाएं क्यों हैं महंगी?

विशेषज्ञों के अनुसार, गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज बेहद चुनौतीपूर्ण और खर्चीली प्रक्रिया है। भूवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर एक डीपवॉटर खोजी कुएं की ड्रिलिंग पर लगभग 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है। वहीं अल्ट्रा-डीपवॉटर परियोजनाओं की लागत इससे भी अधिक होती है। यही वजह है कि अब तक कई वैश्विक कंपनियां भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने से बचती रही हैं।

सरकारी और निजी दोनों कंपनियों को मिलेगा लाभ

प्रस्तावित योजना का लाभ सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को मिल सकेगा। इसी दिशा में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी ने ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत अपना पहला डीपवॉटर खोजी कुआं खोदने का कार्य भी शुरू कर दिया है।

विदेशी निवेश बढ़ाने पर सरकार का फोकस

मौजूदा व्यवस्था में कंपनियों को ब्लॉक मिलने के बाद भूकंपीय सर्वेक्षण और खोजी कुओं की ड्रिलिंग जैसे न्यूनतम कार्य पूरे करने होते हैं। यदि शुरुआती सर्वेक्षण में व्यावसायिक उत्पादन की संभावना कम दिखाई देती है, तो कई कंपनियां भारी निवेश से बचते हुए ब्लॉक वापस कर देती हैं। नई प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य इसी जोखिम को कम करना है, ताकि अधिक वैश्विक कंपनियां भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आएं।

भूवैज्ञानिक डेटा भी होगा बेहतर

सरकार ऑफशोर क्षेत्रों के भूवैज्ञानिक आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने पर भी काम कर रही है। इसके लिए समुद्री क्षेत्रों के दो-आयामी भूकंपीय डेटा के संग्रहण में निवेश किया गया है। साथ ही पुराने डेटा को आधुनिक तकनीक के जरिए दोबारा प्रोसेस कराने की योजना भी बनाई जा रही है, जिससे संभावित तेल और गैस भंडारों की पहचान अधिक सटीक तरीके से की जा सके।

 

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