AI बदल देगा दुनिया? एलन मस्क का बड़ा दावा- ‘2036 तक पैसों की जरूरत नहीं रहेगी’, जानिए क्यों छिड़ी नई बहस
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया भर में चर्चा के बीच अरबपति उद्योगपति एलन मस्क का एक बयान नई बहस का कारण बन गया है। मस्क का कहना है कि यदि एआई और रोबोटिक्स का विकास मौजूदा गति से जारी रहा, तो वर्ष 2036 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में इतना बड़ा बदलाव आ सकता है कि पारंपरिक अर्थों में पैसों का महत्व काफी हद तक समाप्त हो जाए। हालांकि, उन्होंने इसे अपना व्यक्तिगत आकलन बताया है, न कि कोई आधिकारिक आर्थिक पूर्वानुमान।
क्यों कम हो सकता है पैसों का महत्व?
एलन मस्क के अनुसार, आज पैसों की अहमियत इसलिए है क्योंकि वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता सीमित है। उनका मानना है कि यदि एआई और अत्याधुनिक रोबोट बड़े पैमाने पर उत्पादन करने लगें और आवश्यक वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने लगें, तो उनकी कीमतें बेहद कम हो सकती हैं। ऐसे में लोगों की बुनियादी जरूरतें बहुत कम लागत में पूरी होंगी और पैसों की भूमिका पहले जैसी नहीं रह जाएगी।
महंगाई नहीं, डिफ्लेशन बन सकता है सबसे बड़ा मुद्दा
मस्क का मानना है कि भविष्य की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती महंगाई नहीं, बल्कि डिफ्लेशन हो सकता है। उनका तर्क है कि एआई आधारित उत्पादन क्षमता इतनी अधिक बढ़ सकती है कि बाजार में वस्तुओं की भरमार हो जाएगी और उनकी कीमतें लगातार घटने लगेंगी। अर्थव्यवस्था में इस स्थिति को डिफ्लेशन कहा जाता है।
क्या बिना नौकरी के भी होगी आमदनी?
एक बातचीत के दौरान जब मस्क से पूछा गया कि यदि एआई की वजह से बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म हो जाएंगी तो लोगों की आय का क्या होगा, तो उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारें नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता या नियमित भुगतान जैसे मॉडल पर विचार कर सकती हैं।
उनका कहना था कि यदि उत्पादन क्षमता बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो लोगों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने से पारंपरिक तरीके से महंगाई बढ़ने की आशंका कम हो सकती है। हालांकि, इस विचार पर अर्थशास्त्रियों के बीच अलग-अलग राय है और इस पर व्यापक सहमति नहीं बनी है।
एआई को लेकर उत्साह और चिंता दोनों
एलन मस्क लंबे समय से एआई तकनीक के समर्थक होने के साथ-साथ इसके संभावित जोखिमों को लेकर भी लगातार चेतावनी देते रहे हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक मानवता के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा कर सकती है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना इसका विकास गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि समय के साथ एआई को लेकर उनका नजरिया बदलता रहा है। कभी उन्हें यह तकनीक मानव सभ्यता के लिए बेहद लाभकारी दिखाई देती है, तो कभी इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
आने वाले वर्षों में बढ़ेगी एआई पर निर्भरता
मस्क का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई कई क्षेत्रों में इंसानी विशेषज्ञता से आगे निकल सकता है। उनके अनुसार, अब सबसे बड़ी प्राथमिकता एआई के विकास को रोकना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित, पारदर्शी और मानव हितों के अनुरूप विकसित करना है, ताकि भविष्य में इसका उपयोग समाज के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सके।





