राम मंदिर की व्यवस्था में बड़ा बदलाव! चढ़ावा चोरी के बाद संत समाज को सौंपी धार्मिक कमान, बनी नई समिति
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में बड़ा संस्थागत बदलाव करते हुए पूजा-अर्चना और सभी धार्मिक गतिविधियों की निगरानी अब अयोध्या के संत समाज को सौंप दी है। ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया है और स्पष्ट किया है कि अब मंदिर की सभी धार्मिक गतिविधियां वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार संचालित होंगी। साथ ही धार्मिक मामलों में समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।
नौ सदस्यीय समिति में संत समाज का रहेगा बहुमत
नई धार्मिक समिति के अध्यक्ष ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि होंगे। समिति में अयोध्या के पांच प्रमुख संतों को शामिल किया गया है। इनमें ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, महंत कमलनयन दास, महंत डॉ. रामानंद दास, अधिकारी राजकुमार दास और महंत मिथिलेशनंदिनी शरण शामिल हैं।
इसके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ और स्वामी गोविंद देव गिरि भी समिति का हिस्सा होंगे। नौ सदस्यीय इस समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा।
वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप चलेगी पूजा व्यवस्था
स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर सेवा-पूजा वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप ही होती रहे, यह सुनिश्चित करना समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। उनके अनुसार अब मंदिर की धार्मिक व्यवस्था संत समाज की निगरानी में संचालित होगी।
ट्रस्ट के इस निर्णय को राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव माना जा रहा है।
धार्मिक समिति को मिले पांच अहम अधिकार
नई समिति मंदिर में होने वाली नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठानों की निगरानी करेगी। इसके साथ ही रामनवमी, सीता नवमी, विवाह पंचमी सहित सभी प्रमुख धार्मिक पर्वों की तिथि तय करने और आयोजन की जिम्मेदारी भी समिति के पास होगी।
समिति विशेष वैदिक अनुष्ठानों, यज्ञ, रामार्चा और वेद पारायण जैसे आयोजनों की योजना और संचालन भी करेगी। इसके अलावा अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति, आचरण, ड्रेस कोड और पूजा-पद्धति की निगरानी के साथ स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जिम्मेदारी भी समिति को सौंपी गई है। अयोध्या के मठों, मंदिरों, गुरुकुलों और संत समाज के साथ समन्वय स्थापित करना भी समिति के कार्यों में शामिल रहेगा।
महंत दिनेंद्र दास की भूमिका और हुई मजबूत
धार्मिक समिति में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास को शामिल किया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह पिछले कई महीनों से राम मंदिर की पूजा व्यवस्था को पूरी तरह शास्त्रोक्त और परंपरागत बनाने की मांग उठा रहे थे। हाल के समय में वह नियमित रूप से मंदिर पहुंचकर पूजा व्यवस्था का निरीक्षण भी कर रहे थे। ऐसे में समिति में उनकी प्रमुख भूमिका को संत समाज की भागीदारी को औपचारिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला होगी स्थापित
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रशिक्षित अर्चकों की स्थायी व्यवस्था के लिए अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला स्थापित करने का फैसला भी किया है। धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। पहले एक वर्ष का प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया गया था, जिसमें करीब 30 अर्चकों को प्रशिक्षित किया गया था। अब स्थायी प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन और रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पूजा व्यवस्था में क्या बदलेगा
नई व्यवस्था के तहत अब पूजा-पद्धति और धार्मिक कार्यों की निगरानी सीधे धार्मिक समिति करेगी। वैदिक रामानंदी परंपरा के पालन की जिम्मेदारी भी समिति पर होगी। रामनवमी, सीता नवमी और विवाह पंचमी जैसे प्रमुख पर्वों की तिथि और आयोजन का अंतिम निर्णय भी यही समिति करेगी।
इसके अलावा विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की रूपरेखा तैयार करने, पुजारियों के आचरण और ड्रेस कोड की नियमित समीक्षा तथा धार्मिक विषयों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भी समिति को दिया गया है।
चढ़ावा चोरी मामले पर ट्रस्टी का बयान
ट्रस्ट की बैठक के बाद निर्मोही अखाड़े के महंत एवं ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने चढ़ावा चोरी मामले पर कहा कि इस घटना में किसी भी ट्रस्टी की संलिप्तता नहीं पाई गई है। उनके अनुसार मामले में बैंक कर्मियों की भूमिका सामने आई है।
उन्होंने कहा कि घटना के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार किए जा चुके हैं और अब सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और रामलला के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार पहुंच रहे हैं।





