त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई चीनी! एक महीने में 15% उछले दाम, सरकार ने बुलाई आपात बैठक
नई दिल्ली: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में चीनी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ केंद्र सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। बीते एक महीने में घरेलू बाजार में चीनी के दाम 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ आपात बैठक की है और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक सीमा लागू करने के विकल्प पर विचार शुरू कर दिया है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी की कीमतें
बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश में एक्स-मिल कीमतें 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। वहीं, दिल्ली के थोक बाजार में चीनी 4,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बिक रही है। कीमतों में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद सरकार ने हालात की समीक्षा शुरू कर दी है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल चीनी के आयात का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
स्टॉक सीमा लगाने पर सरकार कर रही विचार
कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार सट्टेबाजी और जमाखोरी रोकने के उपायों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके तहत कारोबारियों और चीनी मिलों पर स्टॉक सीमा लागू करने का विकल्प भी चर्चा में है। सरकार का उद्देश्य कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतें बढ़ाने की आशंका पर रोक लगाना है।
जमाखोरी को लेकर मिलों और व्यापारियों में आरोप-प्रत्यारोप
बढ़ती कीमतों को लेकर चीनी मिलों और व्यापारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। चीनी मिल मालिकों का कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार की जमाखोरी नहीं की है। उनका दावा है कि कीमतों में तेजी आने से पहले ही जुलाई माह के लिए निर्धारित बिक्री कोटा का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बाजार में जारी किया जा चुका था।
मिलों का आरोप है कि जमाखोरी व्यापारियों के स्तर पर हो रही है। उनका कहना है कि सरकार को भौतिक सत्यापन के साथ सख्त स्टॉक सीमा लागू करनी चाहिए, ताकि कृत्रिम संकट पैदा करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके।
व्यापारियों ने मिलों पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर, व्यापारियों का कहना है कि चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें खुद मिलों द्वारा बढ़ाई जा रही हैं। उनका आरोप है कि मिलों ने उत्पादन का कम अनुमान पेश कर सरकार से अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी हासिल कर ली, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति घट गई और कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला।
त्योहारी मांग के बीच बढ़ी चिंता
त्योहारी सीजन के करीब आते ही चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यदि कीमतों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और खाद्य उद्योग पर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए सरकार बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।





