WHO की चौंकाने वाली रिपोर्ट! दुनिया की 99% आबादी जहरीली हवा में ले रही सांस, 66 लाख मौतों ने बढ़ाई चिंता
न्यूयॉर्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वर्ल्ड हेल्थ स्टेटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था और पर्यावरण को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी अब भी सुरक्षित सीमा से अधिक प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर है। वर्ष 2021 में घरेलू और बाहरी वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में करीब 66 लाख लोगों की मौत दर्ज की गई। भारत सहित कई देशों के लिए यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2030 तक सभी लोगों को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का वैश्विक लक्ष्य हासिल करना अब पहले की तुलना में अधिक कठिन होता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी धीमी पड़ी है, जिससे तय समय सीमा में लक्ष्य हासिल होने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की रफ्तार हुई धीमी
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 से 2023 के बीच यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) सर्विस कवरेज इंडेक्स केवल 68 से बढ़कर 71 तक पहुंच पाया। यह प्रगति वर्ष 2000 से 2015 के बीच हुई बढ़ोतरी की तुलना में लगभग एक-तिहाई रही। यदि यही गति बनी रही तो वर्ष 2030 तक यह सूचकांक केवल 74 तक पहुंचेगा, जिससे सभी लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का वैश्विक लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया में सुधार, लेकिन लक्ष्य अब भी दूर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र ने स्वास्थ्य सेवाओं के कवरेज में अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर सुधार दर्ज किया है। वर्ष 2015 के बाद इस क्षेत्र के यूएचसी इंडेक्स में 7 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ का मानना है कि वर्ष 2030 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए यह प्रगति अभी भी पर्याप्त नहीं है।
इलाज का खर्च बना गरीबी की बड़ी वजह
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी इलाज पर अपनी जेब से होने वाले खर्च के कारण आर्थिक बोझ झेल रही है। वर्ष 2022 तक करीब 1.6 अरब लोग स्वास्थ्य संबंधी खर्चों की वजह से या तो गरीबी में जीवन जी रहे थे या फिर गरीबी की ओर धकेल दिए गए।
खसरे के बढ़ते खतरे को लेकर भी चेतावनी
डब्ल्यूएचओ ने बच्चों के नियमित टीकाकरण की रफ्तार को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण टीकों का कवरेज अब भी 90 प्रतिशत के वैश्विक लक्ष्य से नीचे है। खासकर खसरे की दूसरी डोज का कवरेज वर्ष 2024 में केवल 76 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे कई देशों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना है तो सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और लोगों पर इलाज का निजी आर्थिक बोझ कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।





