PM मोदी का ऑस्ट्रेलिया से बड़ा संदेश: वैश्विक संकट के दौर में भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी होगी निर्णायक, निवेश के लिए दिया खुला न्योता
मेलबर्न: इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया की भरोसेमंद साझेदारी भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता, ऊर्जा संकट और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक और विश्वसनीय साझेदार के रूप में साथ आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने अपनी-अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हुए भविष्य की मजबूत साझेदारी की नींव तैयार की है।
उन्होंने वर्ष 2022 में रिकॉर्ड समय में हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाला निर्यात दोगुना हो गया है। इस समझौते से दोनों देशों के उद्योगों और कारोबारों को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिला है।
स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र में सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में हाइड्रो परियोजनाओं, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन के लिए विनिर्माण ढांचा विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन भारत के इस ऊर्जा परिवर्तन को गति दे सकते हैं। साथ ही भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी तय किया है।
निजी कंपनियों के लिए खुला परमाणु ऊर्जा क्षेत्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कानून के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को देश की निजी कंपनियों के लिए पूरी तरह खोल दिया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा के लिए महत्वपूर्ण सहयोग का अवसर है और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के बड़े अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़क, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में दीर्घकालिक निवेश के व्यापक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार लगभग 34 किलोमीटर प्रतिदिन की रिकॉर्ड गति से हो रहा है, जबकि भारतीय रेल नेटवर्क में प्रतिदिन 18 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें बिछाई जा रही हैं। उन्होंने इसे गति, पैमाने और स्थिरता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
स्टील, एआई और सेमीकंडक्टर में भी साझेदारी की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक बन चुका है। उन्होंने दोनों देशों से लो-कार्बन एल्यूमीनियम, ग्रीन आयरन और स्वच्छ विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन, क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के तहत भारत सरकार 10 अरब डॉलर से अधिक का वित्तीय सहयोग उपलब्ध करा चुकी है, ताकि वैश्विक स्तर के तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकें।
ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को दिया भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के वित्तीय संस्थानों और पेंशन फंड्स को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड्स 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत में आम लोगों की पेंशन बचत को पवित्र अमानत माना जाता है। ऐसे में निवेशक डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में निश्चिंत होकर निवेश कर सकते हैं और भारत के साथ मिलकर वैश्विक समाधान विकसित कर सकते हैं।





