राम मंदिर चढ़ावा जांच में बड़ा मोड़! चंपत राय-अनिल मिश्रा के जवाबों से बढ़ा सस्पेंस, अब वित्तीय रिकॉर्ड खंगालेंगे CA
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस समानांतर रूप से मामले की पड़ताल कर रही हैं। जांच के बीच अब नए सवाल भी सामने आने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी वित्तीय दस्तावेजों, ऑडिट रिकॉर्ड और चढ़ावा प्रबंधन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की गहन जांच में जुटी है, जबकि पुलिस भी अलग से आपराधिक पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को एसआईटी एक बार फिर अयोध्या पहुंची और मंदिर परिसर में कई घंटे तक जांच की। इस दौरान ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से चढ़ावे की गणना, सुरक्षा व्यवस्था, दान राशि बैंक में जमा करने की प्रक्रिया और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल पूछे गए। हालांकि, इस पूछताछ की आधिकारिक पुष्टि अभी तक एसआईटी या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से नहीं की गई है।
पूछताछ में प्रत्यक्ष भूमिका से किया इनकार
सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने चढ़ावे की गिनती और धन प्रबंधन में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया। बताया जा रहा है कि कई सवालों के जवाब में उन्होंने जिम्मेदारी अन्य कर्मचारियों की ओर बताते हुए टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव का नाम लिया।
वित्तीय दस्तावेजों की जांच में चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद
मामले की वित्तीय जांच को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस चार्टर्ड अकाउंटेंट की भी सहायता ले रही है। विशेषज्ञ ऑडिट रिपोर्ट, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई हो तो उसके दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा सकें।
करीब आठ घंटे तक चली जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच दोपहर करीब 1:40 बजे शुरू हुई और रात करीब 8:30 बजे तक चली। इस दौरान एसआईटी ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच टीम ने केवल दस्तावेजों की जांच नहीं की, बल्कि यह भी समझने का प्रयास किया कि दान पात्रों से राशि निकालने, उसकी गणना करने और बैंक में जमा कराने तक पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है।
बताया जा रहा है कि आईपीएस अधिकारी किरण एस की मौजूदगी में टीम ने विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और संबंधित लोगों से विस्तृत जानकारी ली।
पांच साल की ऑडिट रिपोर्ट जांच का अहम आधार
सूत्रों के अनुसार, जांच में ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के ऑडिट रिकॉर्ड को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसआईटी ने ट्रस्ट से सभी ऑडिट रिपोर्ट, वित्तीय दस्तावेज और संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दान राशि के संग्रह, गणना, बैंक में जमा करने और लेखांकन की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कुछ आवश्यक दस्तावेज अभी तक जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूरा रिकॉर्ड मिलने के बाद ही किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
सीसीटीवी फुटेज और दान पात्रों की भी हो रही जांच
एसआईटी की कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस भी अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। पुलिस टीम ने मंदिर परिसर पहुंचकर दान पात्रों का निरीक्षण किया और पूरी प्रक्रिया को समझा कि चढ़ावा किस प्रकार निकाला जाता है, उसकी गणना कैसे होती है और बैंक तक कैसे पहुंचाया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज भी अपने कब्जे में लिए हैं, जिनका तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की जिम्मेदारी थी और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
प्रतापगढ़ तक पहुंची जांच की कड़ी
मामले की जांच अब अयोध्या से बाहर भी पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की एक टीम आरोपी अविनाश शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित गांव पहुंची, जहां उसके परिजनों से पूछताछ की गई। इस दौरान कुछ दस्तावेज भी जब्त किए गए, जिनका अन्य रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान मिले कुछ जवाबों में स्पष्टता नहीं थी और कई बिंदुओं पर विरोधाभास भी सामने आया है, जिसकी जांच जारी है।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी और पुलिस अब केवल मंदिर कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं। जांच बैंक कर्मचारियों तक भी पहुंच गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि चढ़ावा गिनने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति कैसे हुई, उनका चयन किस आधार पर किया गया और कहीं किसी स्तर पर प्रभाव या सिफारिश का इस्तेमाल तो नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि कुछ बैंक कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल मामले में एसआईटी वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि पुलिस आपराधिक जांच को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।





