लखनऊ अग्निकांड पर सीएम योगी का ताबड़तोड़ एक्शन! 4 गिरफ्तार, 4 अफसर सस्पेंड, अब बड़े अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
लखनऊ: राजधानी के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। अलीगढ़ दौरे के दौरान हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और सीधे लखनऊ रवाना हो गए। देर रात तक चली समीक्षा बैठकों के बाद कई बड़े फैसले लिए गए, जिनमें चार आरोपियों की गिरफ्तारी, चार अधिकारियों का निलंबन और विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन शामिल है।
घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर लिया हालात का जायजा
मुख्यमंत्री लखनऊ पहुंचने के बाद सबसे पहले हादसे वाली इमारत पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और चिकित्सकों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
चार अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रथम दृष्टया लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इनमें बिजली विभाग के जानकीपुरम क्षेत्र के अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल कुमार और अवर अभियंता प्रमोद पांडे शामिल हैं।
हाई लेवल बैठक में एसआईटी गठन का फैसला
घटनास्थल और अस्पताल के दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के बाद दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित करने का निर्णय लिया गया।
एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। जांच दल को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
चार आरोपी गिरफ्तार, जांच का दायरा बढ़ा
मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषॉक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ अब जांच का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच में कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी भी जांच के घेरे में आ सकती है। रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
10 साल पुराना ध्वस्तीकरण आदेश फिर चर्चा में
अग्निकांड के बाद भवन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी सामने आने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी के खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था।
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनधिकृत निर्माण के आरोप में मामला दर्ज करने के बाद 10 मई 2016 को भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया था। हालांकि, दो माह से भी कम समय में 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब इस फैसले को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
1980 में हुआ था भवन का आवंटन
रिकॉर्ड के मुताबिक यह भवन 11 जुलाई 1980 को किराया-क्रय योजना के तहत आवंटित किया गया था। बाद में स्वामित्व हस्तांतरण और नामांतरण की प्रक्रियाओं के बाद वर्ष 2014 में वर्तमान मालिकों के नाम दर्ज हुआ। इसी वर्ष आवासीय उपयोग के लिए भवन का मानचित्र भी स्वीकृत किया गया था।
अब एसआईटी इस बात की भी जांच करेगी कि भवन में हुए निर्माण, उसके उपयोग और सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई।





