अमरनाथ यात्रा पर सुरक्षा का अभेद कवच! 55 हजार जवानों की तैनाती, ड्रोन से लेकर फिदायीन हमलों तक हर खतरे पर कड़ी नजर

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नई दिल्ली : आगामी अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक सुरक्षा रणनीति तैयार कर ली है। तीन जुलाई से शुरू होने वाली पवित्र यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया जाएगा। यात्रा मार्ग, बेस कैंप और श्रद्धालुओं के ठहराव स्थलों पर हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार यात्रा की सुरक्षा के लिए सेना, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित कुल 55 हजार से अधिक जवानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही केंद्रीय और स्थानीय खुफिया एजेंसियां भी लगातार निगरानी रखेंगी।

संभावित खतरों को लेकर एजेंसियां सतर्क

सुरक्षा एजेंसियों को मिली सूचनाओं के आधार पर यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार के सुरक्षा खतरों की आशंका जताई गई है। इनमें ड्रोन हमले, हैंड ग्रेनेड हमला, फिदायीन कार्रवाई और आईईडी जैसे खतरे शामिल हैं।

हालांकि सुरक्षा तंत्र ने इन संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष तैयारी की है। यात्रा के पूरे मार्ग पर आधुनिक तकनीक और मानव खुफिया तंत्र के जरिए निगरानी रखी जाएगी।

8 जून को होगी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

अमरनाथ यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 8 जून को उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ तथा विभिन्न खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

बैठक में यात्रा मार्ग की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होगी लागू

यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। मल्टी एजेंसी सेंटर के माध्यम से सुरक्षा बलों और खुफिया इकाइयों के बीच त्वरित सूचना आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा।

सीमा पार से आने वाली संदिग्ध गतिविधियों और ड्रोन की निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। वहीं हैंड ग्रेनेड और आईईडी जैसे खतरों से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीमों को तैनात किया जाएगा।

ड्रोन, स्कैनर और खोजी दस्तों की मदद से निगरानी

यात्रा मार्ग और रसद आपूर्ति केंद्रों पर ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी जाएगी। साथ ही स्कैनर और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

वाहनों में संभावित विस्फोटक या चिपकू बम की पहचान के लिए विशेष बलों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा खोजी कुत्तों की टीम भी पूरे मार्ग पर तैनात रहेगी।

श्रद्धालुओं के शिविरों के आसपास रहेगा त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा

यात्रियों के ठहरने वाले शिविरों और संवेदनशील स्थानों के आसपास तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। सुरक्षा बलों के प्रशिक्षित जवान चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे।

ड्रोन खतरों से निपटने के लिए केंद्रीय बलों के विशेष निशानेबाज भी तैनात किए जाएंगे, जिन्हें संदिग्ध उड़ने वाली वस्तुओं को निष्क्रिय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

खुफिया एजेंसियों की रहेगी पैनी नजर

सुरक्षा एजेंसियां संभावित ओवर ग्राउंड वर्करों और संदिग्ध गतिविधियों पर मानव एवं तकनीकी खुफिया तंत्र के माध्यम से लगातार नजर रखेंगी। यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक रोकने के लिए सभी एजेंसियों को समन्वित रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

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