भारत के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट से बढ़ी चीन-पाकिस्तान की टेंशन, एएमसीए कार्यक्रम में निजी कंपनियों की एंट्री

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नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपने महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम एएमसीए को नई रफ्तार दे दी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना में निजी कंपनियों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसे भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए देश की तीन प्रमुख रक्षा कंपनियों और कंसोर्टियम को अनुरोध प्रस्ताव भेजे हैं। माना जा रहा है कि यह परियोजना भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान की चिंता भी बढ़ा सकती है।

इन रक्षा कंपनियों को भेजा गया प्रस्ताव

जानकारी के अनुसार जिन प्रमुख समूहों को प्रस्ताव भेजे गए हैं, उनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम, साथ ही भारत फोर्ज, बीईएमएल और डाटा पैटर्न्स समूह शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को शुरुआती प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

15 हजार करोड़ रुपये की मेगा परियोजना

सूत्रों के अनुसार चयनित कंपनी को करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से एएमसीए के पांच प्रोटोटाइप तैयार करने होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक इन प्रोटोटाइप्स को विकसित कर लिया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा कर सकती है, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम मौजूद हैं। वर्तमान में अमेरिका, रूस और चीन इस तकनीक में अग्रणी माने जाते हैं।

क्या होता है स्टील्थ फाइटर जेट?

स्टील्थ फाइटर जेट ऐसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान होते हैं जिन्हें इस तरह डिजाइन किया जाता है कि दुश्मन के रडार, इंफ्रारेड सेंसर और निगरानी प्रणालियां उन्हें आसानी से पकड़ न सकें।

इन विमानों में विशेष सामग्री, आधुनिक इंजन डिजाइन और खास एयरफ्रेम तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उनकी रडार पहचान बेहद कम हो जाती है। इसी वजह से इन्हें “लो ऑब्जर्वेबल एयरक्राफ्ट” भी कहा जाता है।

दुनिया के प्रमुख स्टील्थ फाइटर जेट्स में एफ-35 लाइटनिंग-2, एफ-22 रैप्टर, चेंगदू जे-20 और सुखोई एसयू-57 शामिल हैं।

दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला करने की क्षमता

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध में स्टील्थ तकनीक बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। इस तकनीक से लैस विमान दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर मिशन को अंजाम देने में सक्षम होते हैं।

इनमें आधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सुपरक्रूज तकनीक और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां लगाई जाती हैं। हालांकि स्टील्थ तकनीक विमान को पूरी तरह अदृश्य नहीं बनाती, लेकिन उसकी पहचान और ट्रैकिंग को बेहद कठिन जरूर बना देती है।

तेजस के बाद भारत का अगला बड़ा मिशन

भारत पहले ही स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान विकसित कर चुका है। अब एएमसीए परियोजना को भारतीय वायुसेना के भविष्य के लिए सबसे अहम कार्यक्रमों में शामिल माना जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना से न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश में निजी रक्षा उद्योग, अनुसंधान और स्वदेशी सैन्य तकनीक को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।