ईरान जंग का असर हज यात्रा पर भारी, किराया 3-4 गुना बढ़ा; कई देशों ने शुरू की सब्सिडी योजना

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डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध का असर अब धार्मिक यात्राओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस साल हज यात्रा पर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए खर्च अचानक कई गुना बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष के कारण उड़ानों, ईंधन और सप्लाई नेटवर्क पर असर पड़ा है, जिससे हज पैकेज की कीमतों में भारी उछाल आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में हवाई मार्गों पर दबाव बढ़ने और कई रूट प्रभावित होने से यात्रा संचालन महंगा हो गया है। इसी वजह से हज यात्रा पैकेजों की कीमतें यात्रा शुरू होने से पहले ही तीन से चार गुना तक बढ़ गई हैं।

कई देशों ने शुरू की राहत योजना

बढ़ती लागत को देखते हुए Indonesia, Pakistan और Malaysia समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को राहत देने के लिए विशेष सब्सिडी योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य तीर्थयात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीमित उपलब्धता, ईंधन की कीमतों में उछाल और सुरक्षा कारणों से बढ़े बीमा खर्च ने हज यात्रा को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा महंगा बना दिया है।

लगातार बढ़ रहा हज का खर्च

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हज यात्रा का खर्च लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • 2023 में औसत प्रति व्यक्ति खर्च करीब 3.25 लाख रुपये था
  • 2024 में यह बढ़कर लगभग 3.35 लाख रुपये पहुंच गया
  • 2025 में औसत खर्च करीब 3.40 लाख रुपये रहा
  • जबकि 2026 में यह आंकड़ा 3.74 लाख रुपये से भी ऊपर पहुंच गया है

भारत में क्या हैं तैयारियां?

भारत में हज यात्रा की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी Ministry of Minority Affairs संभाल रहा है। मंत्रालय भारतीय हज समिति, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सऊदी प्रशासन के साथ समन्वय कर यात्रियों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित कर रहा है।

सरकारी स्तर पर यात्रियों को बेहतर लॉजिस्टिक्स, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है ताकि बढ़ती चुनौतियों के बावजूद यात्रा सुगम बनी रहे।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और पर्यटन यात्राओं की लागत में और बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

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