ओडिशा सरकार लाई नया मरीन फिशिंग कानून, ब्लू इकॉनमी को मिलेगा बढ़ावा

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ओडिशा मंत्रिमंडल ने बुधवार को कानून, ऊर्जा और मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास सहित सात विभागों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

कैबिनेट की सबसे अहम मंजूरियों में ओडिशा मरीन फिशिंग (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 2026 शामिल है। इसके तहत 1982 के पुराने कानून को समाप्त कर समुद्री मत्स्य क्षेत्र के लिए आधुनिक और व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा।

मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट में डीप सी फिशिंग मिशन और झींगा निर्यात मिशन की घोषणा की थी। ऐसे में नए कानून के जरिए समुद्री संसाधनों के संरक्षण, तटीय सुरक्षा, समुद्री शैवाल विकास और मैरिकल्चर को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात को 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। यह पहल “विकसित ओडिशा विजन 2036-47” और राज्य की ब्लू इकॉनमी रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है।

कैबिनेट ने कानून विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसके तहत 1974 से 2025 के बीच बने 358 अप्रासंगिक और पुराने कानूनों को समाप्त किया जाएगा। सरकार के अनुसार इनमें कई संशोधन अधिनियम शामिल हैं, जिनकी उपयोगिता अब समाप्त हो चुकी है। ओडिशा राज्य विधि आयोग की सिफारिशों के आधार पर “ओडिशा रिपीलिंग बिल 2026” लाने का फैसला लिया गया है।

ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए कैबिनेट ने ओडिशा थर्मल पावर नीति 2008 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके तहत स्वतंत्र बिजली उत्पादकों द्वारा सरकार को अनिवार्य रूप से दी जाने वाली बिजली हिस्सेदारी को 12 से 14 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव केंद्र सरकार की सिफारिशों और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की नीति के अनुरूप किया गया है।

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