क्रिकेट बैट के नियम क्या हैं, क्यों होता है गेज टेस्ट—जानिए बल्ले की लंबाई, चौड़ाई और अंपायर की सख्त जांच का पूरा नियम

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क्रिकेट में हर उपकरण के लिए सख्त नियम तय हैं और बल्लेबाज इन्हीं मानकों के भीतर रहकर खेलते हैं। यही वजह है कि मैच के दौरान अंपायर बल्लेबाज के बैट की जांच करते हैं, जिसे आमतौर पर गेज टेस्ट कहा जाता है। इस जांच में बैट की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई का आकलन किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बल्ला आईसीसी के नियमों के अनुरूप है या नहीं।

क्या हैं आईसीसी के अनुसार बैट के मानक नियम
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के नियमों के अनुसार क्रिकेट बैट की अधिकतम लंबाई 38 इंच यानी 96.52 सेंटीमीटर निर्धारित है। इसमें हैंडल की लंबाई भी शामिल होती है। बैट की अधिकतम चौड़ाई 4.25 इंच यानी 10.8 सेंटीमीटर हो सकती है। इसके अलावा बल्ले की मोटाई सीमित होती है, जो तय मानकों से अधिक नहीं हो सकती।

बैट के वजन पर कोई सख्त सीमा नहीं
आईसीसी के नियमों में बैट के वजन को लेकर कोई स्पष्ट सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, बैट के आकार और संरचना के कारण इसका वजन सामान्यतः एक तय दायरे में ही रहता है। आम तौर पर पुरुष खिलाड़ियों के बैट का वजन 1.1 किलोग्राम से 1.3 किलोग्राम के बीच होता है, जबकि महिला क्रिकेटरों के बैट का वजन लगभग 1 से 1.15 किलोग्राम तक रहता है।

महान खिलाड़ियों के बैट का वजन भी रहा अलग-अलग
क्रिकेट इतिहास में कई दिग्गज खिलाड़ी भारी बैट का इस्तेमाल करते रहे हैं। सचिन तेंदुलकर का बैट लगभग 1.47 किलोग्राम तक वजन का होता था। वहीं एमएस धोनी भी अपेक्षाकृत भारी बल्ले से खेलते रहे हैं। वर्तमान में विराट कोहली आमतौर पर 1.1 से 1.2 किलोग्राम वजन के बैट का उपयोग करते हैं।

क्या होता है गेज टेस्ट और क्यों जरूरी है
गेज टेस्ट एक तरह की तकनीकी जांच है, जिसमें अंपायर यह सुनिश्चित करते हैं कि बल्ला नियमों के अनुसार है या नहीं। इसके लिए एक विशेष फ्रेम या गेज का उपयोग किया जाता है, जो लकड़ी या प्लास्टिक का बना होता है। बैट को इस फ्रेम से गुजारा जाता है और यदि बल्ला निर्धारित मापदंडों से बड़ा पाया जाता है तो उसे अमान्य घोषित कर दिया जाता है।

इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी खिलाड़ी नियमों से बाहर जाकर मोटे या चौड़े बल्ले का उपयोग करके अनुचित लाभ न ले सके।

नियमों के पीछे उद्देश्य—खेल में निष्पक्षता बनाए रखना
आईसीसी के ये मानक इसलिए बनाए गए हैं ताकि खेल में संतुलन और निष्पक्षता बनी रहे। बैट का आकार सीमित रखने से गेंदबाज और बल्लेबाज के बीच प्रतिस्पर्धा समान रहती है और खेल की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

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