US सीनेट कमेटी के सामने तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा, पाकिस्तान बना रहा अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल

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नई दिल्ली : अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने हाउस इंटेलिजेंस कमेटी और सीनेट इंटेलिजेंस हियरिंग के दौरान पाकिस्तान के मिसाइल (Missiles) प्रोग्राम पर गंभीर चेतावनी जारी की है. खुफिया कम्युनिटी का आकलन है कि पाकिस्तान ऐसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें डेवलप कर रहा है, जिनमें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) शामिल हो सकती हैं. ये मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक हथियारों के साथ सीधे अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान सभी अपनी मिसाइल प्रणालियों को एडवांस कर रहे हैं. साल 2035 तक अमेरिका के लिए मिसाइल खतरों की तादाद मौजूदा 3,000 से बढ़कर 16 हजार से ज्यादा हो सकती है. चीन और रूस को सबसे एक्टिव खतरों के रूप में देखा जा रहा है, जबकि उत्तर कोरिया का साइबर प्रोग्राम भी उसके हथियारों के लिए फंड जुटा रहा है.

तुलसी गबार्ड ने कहा कि पाकिस्तान का लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम करना चिंता का विषय है क्योंकि इसमें ऐसी ICBM तकनीक शामिल हो सकती हैं, जो अमेरिकी होमलैंड पर हमला करने की रेंज रखती हैं. खुफिया विभाग (IC) का मानना है कि पाकिस्तान पारंपरिक और परमाणु पेलोड ले जाने वाले एडवांस सिस्टम पर रिसर्च कर रहा है. यह विकास अमेरिका की मौजूदा मिसाइल डिफेंस प्रणाली को चुनौती देने या उसे बायपास करने की क्षमता रखने वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करता है.

ब्रिफिंग के दौरान तुलसी गबार्ड ने बताया कि ईरान भी अपनी स्पेस लॉन्च टेक्नोलॉजी का उपयोग करके 2035 से पहले सैन्य रूप से व्यवहार्य ICBM विकसित कर सकता है. वहीं, उत्तर कोरिया की मिसाइलें पहले से ही अमेरिकी जमीन तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं. उत्तर कोरिया अपने परमाणु शस्त्रागार के विस्तार में जुटा है. रोचक तथ्य यह है कि उत्तर कोरिया ने अकेले 2025 में क्रिप्टोकरेंसी चोरी के जरिए 2 अरब डॉलर जुटाए हैं, जिसका इस्तेमाल वह अपने रणनीतिक हथियार कार्यक्रमों की फंडिंग के लिए कर रहा है.

अमेरिकी खुफिया समुदाय के मुताबिक, अगले एक दशक में सुरक्षा चुनौतियां कई गुना बढ़ जाएंगी. चीन और रूस लगातार अपने मिसाइल सिस्टम में आरएंडडी (R&D) कर रहे हैं, जिससे वे अमेरिकी रक्षा कवच को भेद सकें. मिसाइलों की तादाद में होने वाला भारी इजाफा और नई मिसाइल डिलीवरी प्रणालियों का विकास अमेरिका के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है.