डिजिटल इंडिया की बड़ी जीत! UPI ने नकद को पीछे छोड़ा, अब ग्रामीण भारत में ‘रुपे कार्ड’ को बढ़ावा देने की तैयारी
डिजिटल भुगतान को लेकर भारत ने एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, UPI अब देश में लेनदेन का सबसे पसंदीदा माध्यम बन चुका है और इसने नकद भुगतान को भी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल ट्रांजेक्शन में UPI की हिस्सेदारी 57 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि कैश ट्रांजेक्शन का हिस्सा 38 फीसदी रह गया है। आसान इस्तेमाल और तुरंत फंड ट्रांसफर की सुविधा को इसकी सबसे बड़ी वजह माना गया है।
UPI बना लोगों की पहली पसंद
रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल पेमेंट अब रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है। करीब 65 फीसदी UPI यूजर्स ऐसे हैं जो हर दिन कई डिजिटल ट्रांजेक्शन करते हैं। खास बात यह है कि सभी सामाजिक और आर्थिक वर्गों में डिजिटल भुगतान का चलन लगातार बढ़ रहा है, जिससे साफ है कि भारत तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है।
चिंतन शिविर में पेश हुई अहम रिपोर्ट
यह रिपोर्ट वित्तीय सेवा विभाग की ओर से 13–14 फरवरी 2026 को आयोजित चिंतन शिविर के दौरान जारी की गई। “रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-UPI (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण” शीर्षक वाली इस स्टडी में 15 राज्यों के 10,378 लोगों को शामिल किया गया। इनमें यूजर्स, व्यापारी और सेवा प्रदाता सभी शामिल थे। विश्लेषण से पता चला कि डिजिटल भुगतान को अपनाने की रफ्तार हर वर्ग में तेज हुई है।
ग्रामीण इलाकों में रुपे कार्ड को बढ़ावा देने की जरूरत
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में RuPay डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन जरूरी है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इसके लिए व्यापारी सशक्तिकरण कार्यक्रम, कम मूल्य के लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए UPI Lite जैसे समाधान, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता और फ्रॉड जोखिम को कम करने में निरंतर निवेश की सिफारिश की गई है।
UPI ने कैश को क्यों छोड़ा पीछे
रिपोर्ट में बताया गया है कि Unified Payments Interface की सफलता के पीछे इसकी सरल प्रक्रिया, 24×7 उपलब्धता और तुरंत भुगतान की सुविधा सबसे बड़ी वजह है। यही कारण है कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक, UPI अब सबसे भरोसेमंद माध्यम बन चुका है।
सरकार ने 8,200 करोड़ से ज्यादा किए खर्च
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा निवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य के UPI ट्रांजेक्शन को समर्थन देने के लिए कुल 8,276 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिए गए। इसमें FY22 में 1,389 करोड़, FY23 में 2,210 करोड़, FY24 में 3,631 करोड़ और FY25 में 1,046 करोड़ रुपये शामिल हैं।
डिजिटल इंडिया मिशन को मिली नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि UPI की बढ़त और ग्रामीण इलाकों में रुपे कार्ड को प्रोत्साहन देने की तैयारी डिजिटल इंडिया को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इससे न सिर्फ कैश पर निर्भरता घटेगी, बल्कि वित्तीय समावेशन को भी मजबूती मिलेगी।



