अमेरिका के प्रतिबंध का दिखने लगा असर, भारत की तेल टोकरी में घटा रूस का हिस्सा
नई दिल्ली : दिसंबर 2025 में भारत और रूस के बीच कच्चे तेल के व्यापार में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी प्रतिबंधों और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच रूस से होने वाला आयात पिछले कई महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से 2.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो फरवरी 2025 के बाद किसी भी महीने में सबसे कम है। यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा रूस की तेल कंपनियों रोजनेफ्टऔर लुकोइल (Lukoil) पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण आई। अमेरिका ने 22 अक्टूबर 2025 को इन कंपनियों पर प्रतिबंधों की घोषणा की थी और 21 नवंबर 2025 को इनके साथ सभी लेन-देन समाप्त करने की अंतिम समय-सीमा तय की थी।
आयात में गिरावट के आंकड़े
नवंबर 2025 के मुकाबले: लगभग 27% की कमी (नवंबर में आयात 3.7 अरब डॉलर था)
दिसंबर 2024 के मुकाबले: 15% की कमी
हालांकि, रूस 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। दिसंबर 2025 में भारत के कुल 11.4 अरब डॉलर के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 24% रही। अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता थे:
इराक: 2.4 अरब डॉलर
सऊदी अरब: 1.8 अरब डॉलर

संयुक्त अरब अमीरात: 1.7 अरब डॉलर
अमेरिका: 0.6 अरब डॉलर
दिसंबर 2025 में अमेरिका से भारत को 0.6 अरब डॉलर का कच्चा तेल मिला, जो दिसंबर 2024 के 0.4 अरब डॉलर से अधिक है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच अमेरिका का कुल निर्यात बढ़कर 8.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 5 अरब डॉलर से 7.8% अधिक है।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारत ने रूस से तेल आयात को शून्य करने पर सहमति जताई है। हालांकि, मोदी सरकार ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। सरकार का कहना है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी आधार पर आयात से जुड़े फैसले लिए जाते हैं।

