एविएशन सेक्टर में अगले 10 साल में देश को 30000 से ज्यादा नए पायलटों की जरूरत : डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत के एयरोस्पेस और एविएशन सेक्टर में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। यह बदलाव देशी तकनीक, मजबूत उद्योग साझेदारी और पूरी सरकार के संयुक्त प्रयासों की वजह से संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों में भारत में हवाई यात्रा तेजी से बढ़ी है और अब यह आम लोगों की पहुंच में आने लगी है।

डॉ. सिंह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘उड़ान’ योजना शुरू की थी, तब बहुत कम लोगों को विश्वास था कि यह इतनी बड़ी सफलता पाएगी। लेकिन आज देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हो चुकी है, नए हवाई रूट तेजी से जुड़ रहे हैं और हवाई यात्रियों की संख्या भी कई गुना बढ़ गई है। इसी कारण आने वाले 10 सालों में भारत को 30000 से अधिक नए पायलटों की जरूरत पड़ेगी। साथ ही छोटे यात्री विमानों की मांग भी काफी बढ़ने वाली है।

कार्यक्रम के दौरान जितेंद्र सिंह ने नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (एनएएल) के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनएएल देश में सस्ते हवाई सफर और पायलट ट्रेनिंग के लिए स्वदेशी दो-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट और छोटे विमानों के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। डॉ. सिंह ने भारत के पहले ऑल-कम्पोजिट दो-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट हंसा-3 (एनजी) के प्रोडक्शन वर्जन को लॉन्च किया। यह विमान बढ़ती पायलट ट्रेनिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है और आने वाले 20 वर्षों में लगभग 30000 पायलटों की आवश्यकता को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि इंडस्ट्री पार्टनर मेसर्स पायनियर क्लीन एम्प्स आंध्र प्रदेश के कुप्पम में 150 करोड़ रुपये की लागत से एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तैयार कर रहा है। इस केंद्र में हर साल 100 एयरक्राफ्ट तक बनाए जाएंगे, जो भारत के एविएशन सेक्टर को और मजबूत करेंगे। डॉ. सिंह ने सीएसआईआर-एनएएल के 19-सीटर सारस एमके-2 एयरक्राफ्ट के विकास पर भी जानकारी दी, जो उड़ान योजना जैसी योजनाओं के तहत क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा।

भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह दुनिया के सबसे बड़े एविएशन मार्केट्स में शामिल हो सकता है।

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