‘हम जंग बेचने नहीं आए, शांति बनाने आए हैं’, ट्रंप के प्रस्ताव खारिज करने के बाद अराघची का दो टूक जवाब

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने देश का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और वह न्यूयॉर्क युद्ध का रास्ता तलाशने नहीं, बल्कि शांति कायम करने के लिए आए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ईरान पर सैन्य हमला किया जाता है तो तेहरान उसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें सात दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की बात कही गई थी। ट्रंप ने प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकराया कि ईरान दबाव में होने के कारण तत्काल समझौता करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह आगे बातचीत हो सकती है।

‘युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हमले का जवाब देंगे’

अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि राष्ट्रपति पेजेशकियान और वह न्यूयॉर्क युद्ध बेचने नहीं, बल्कि शांति कायम करने आए हैं। उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी आक्रामक कार्रवाई के सामने मजबूती से खड़ा रहेगा।

ईरानी विदेश मंत्री ने कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात कही, लेकिन सैन्य कार्रवाई की स्थिति में जवाब देने की तैयारी भी स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि अगर हालात बेहद गंभीर होकर ‘एपोकैलिप्टिक वॉर’ तक पहुंचते हैं, तब भी ईरान पीछे नहीं हटेगा।

ईरान ने दिया था 7 दिन का रोडमैप

ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत कुछ अमेरिकी शर्तों को पूरा किए जाने पर ईरान सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक बातचीत शुरू करने के लिए तैयार था।

अराघची के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। उनका कहना था कि अमेरिका के प्रस्ताव स्वीकार करते ही अगले दिन से सात दिन की समयसीमा शुरू हो सकती है। सात दिन पूरे होने के बाद होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है।

होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने रखीं शर्तें

ईरान के प्रस्ताव के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को खोलने से पहले अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे। इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत देना और युद्धविराम शामिल हैं। प्रस्ताव में लेबनान को भी युद्धविराम के दायरे में शामिल करने की बात कही गई है।

अराघची ने कहा कि अमेरिका की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने की औपचारिक जानकारी उस समय तक मध्यस्थों के जरिए ईरान को नहीं मिली थी और तेहरान अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 26 सितंबर को सार्वजनिक तौर पर प्रस्ताव खारिज करने की पुष्टि कर दी।

ट्रंप बोले- ईरान दबाव में है

ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान तत्काल होर्मुज स्ट्रेट खोलने का समझौता इसलिए करना चाहता है क्योंकि वह भारी दबाव में है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं किया और कहा कि इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच आगे बातचीत हो सकती है।

इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीतिक संपर्क की संभावना बनी हुई है। हालांकि, सात दिन वाले प्रस्ताव को लेकर अमेरिका और ईरान की शर्तों में फिलहाल बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

पेजेशकियान भी बोले- दबाव में बातचीत नहीं

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कहा है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव और धमकियों के बीच किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।

ईरान की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वह कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना जरूरी होगा। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने की अपनी नीति पर कायम है।

होर्मुज बना गतिरोध का सबसे अहम मुद्दा

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से समुद्री आवाजाही और तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ा है।

फिलहाल ईरान अपने सात दिन वाले प्रस्ताव पर कायम है, जबकि ट्रंप इसे खारिज कर चुके हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों की ओर से बातचीत की संभावना के संकेत दिए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज, युद्धविराम और परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच किसी साझा रास्ते पर सहमति बनती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।

 

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