20 साल बाद ईरान पर IAEA का बड़ा एक्शन, परमाणु कार्यक्रम का मामला UN सुरक्षा परिषद पहुंचा; बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
नई दिल्ली: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार को करीब 20 साल बाद पहली बार ईरान के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेजने का फैसला किया। ईरान पर आरोप है कि उसने उन जगहों पर मिले यूरेनियम के निशानों की जांच में जरूरी सहयोग नहीं किया, जिन्हें उसने अपनी परमाणु गतिविधियों के तहत घोषित नहीं किया था।
पश्चिमी देशों के अधिकारियों को आशंका है कि इन स्थानों से मिले यूरेनियम के निशान इस बात के सबूत हो सकते हैं कि ईरान ने 2003 तक गुप्त रूप से परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाया था। हालांकि, तेहरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा है।
सुरक्षा परिषद में पहुंचा मामला, नए प्रतिबंध की संभावना
ईरान का मामला सुरक्षा परिषद तक पहुंचने के बाद उस पर नए प्रतिबंध लगाने और उसकी संपत्तियां जब्त करने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, फिलहाल इस तरह के कड़े दंडात्मक कदम की संभावना कम मानी जा रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि ईरान के करीबी सहयोगी रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो का अधिकार है।
35 सदस्यीय बोर्ड में 23 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया
वियना स्थित IAEA मुख्यालय में हुए मतदान में 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 23 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। चीन, रूस और नाइजर ने प्रस्ताव का विरोध किया। आठ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जबकि एक देश बकाया राशि के कारण वोट नहीं कर सका।
बंद कमरे में हुई इस वोटिंग के नतीजों की जानकारी नाम न बताने की शर्त पर राजनयिकों ने दी।
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पेश किया प्रस्ताव
ईरान के खिलाफ यह प्रस्ताव अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पेश किया था। इस कार्रवाई पर जून 2025 से विचार चल रहा था। उस समय IAEA बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला था कि ईरान जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और परमाणु प्रसार रोकने से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने में विफल रहा है।
ईरान का मामला सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस सप्ताह अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया था। इसके बाद तेहरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया। दोनों देशों के बीच हमलों का यह नया दौर छह महीने से अधिक समय से जारी युद्ध में फिर बढ़ती खुली दुश्मनी का संकेत माना जा रहा है।
IAEA ने ईरान से समझौतों का पालन करने को कहा
प्रस्ताव के मसौदे में IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से कहा गया है कि वह प्रस्ताव और पहले पारित किए गए प्रस्तावों की जानकारी IAEA के सभी सदस्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा को संबंधित नियमों के तहत उपलब्ध कराएं।
प्रस्ताव में ईरान से पहले किए गए समझौतों के पालन में हुई अपनी विफलता को जल्द से जल्द सुधारने और IAEA की जरूरी शर्तों को पूरा करने को भी कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु सामग्री का गलत इस्तेमाल न हो।
जून 2025 के हमलों के बाद निरीक्षकों की पहुंच रोकी
जून 2025 में 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसके बाद से ईरान ने IAEA के निरीक्षकों को उन परमाणु स्थलों तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी, जो इन हमलों से प्रभावित हुए थे।
जून में हुई बमबारी के बाद IAEA ईरान के पास मौजूद हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंच चुके यूरेनियम भंडार की स्थिति की भी पुष्टि नहीं कर सका है।
ईरान के पास 440.9 किलो 60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम
IAEA के मुताबिक, ईरान के पास 60 फीसदी शुद्धता तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यानी 972 पाउंड यूरेनियम का भंडार है। यह हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 फीसदी शुद्धता के स्तर से तकनीकी रूप से बहुत दूर नहीं है।
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पिछले साल एक इंटरव्यू में चेतावनी दी थी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को हथियार बनाने की दिशा में ले जाने का फैसला करता है तो उसके पास मौजूद इस भंडार से 10 परमाणु बम तक बनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास फिलहाल ऐसा कोई परमाणु हथियार मौजूद है।





