16 साल का इंतजार खत्म, धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर जीता गोल्ड; भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी में रचा इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय तीरंदाजी के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। स्टार रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी में नया इतिहास रच दिया। जापान के नाकानिशी जुन्या के खिलाफ बेहद रोमांचक फाइनल में धीरज ने शूट ऑफ में 10-9 से जीत दर्ज की। इस स्वर्ण के साथ भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजों का विश्व कप फाइनल में गोल्ड का 16 साल पुराना इंतजार खत्म हो गया।
पांच सेट के बाद बराबरी, शूट ऑफ में निकला फैसला
25 वर्षीय धीरज ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद सेना के इस तीरंदाज ने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में अपनी सटीक निशानेबाजी से प्रभावित किया। फाइनल में उनका सामना दुनिया के 20वें नंबर के जापानी तीरंदाज नाकानिशी जुन्या से हुआ। दोनों के बीच मुकाबला पांच सेट तक चला और स्कोर 5-5 से बराबर रहा। इसके बाद शूट ऑफ में धीरज ने 10-9 से बाजी मारकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
जयंत तालुकदार के कांस्य के बाद अब आया गोल्ड
विश्व कप फाइनल में भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजों के लिए स्वर्ण पदक अब तक दूर रहा था। भारत के जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में विश्व कप फाइनल के दौरान कांस्य पदक जीता था। इसके बाद लंबे समय तक पुरुष रिकर्व वर्ग में भारत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक नहीं जीत सका। धीरज की जीत ने इस लंबे इंतजार को खत्म कर दिया।
मां ने मंगलसूत्र गिरवी रखकर खरीदा था बेटे के लिए धनुष
धीरज की इस कामयाबी के पीछे परिवार के संघर्ष और त्याग की कहानी भी जुड़ी है। करियर के शुरुआती दिनों में परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। वर्ष 2017 में बेहतर प्रशिक्षण के लिए धीरज को महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी, लेकिन पैसों की कमी बड़ी बाधा बनी हुई थी। ऐसे समय में उनकी मां रेवती ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया। इसी रकम से धीरज के लिए नया धनुष खरीदा गया।
तीरंदाजी छोड़ने का भी बना लिया था मन
एक दौर ऐसा भी आया जब धीरज ने तीरंदाजी छोड़ने के बारे में सोचा था। हालांकि, परिवार के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ते रहने की ताकत दी। उनके पिता श्रवण कुमार भी तीरंदाजी से जुड़े रहे हैं और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ तीरंदाजी जजों में शामिल हैं। परिवार के समर्थन के साथ लगातार मेहनत ने धीरज को आज दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों में पहुंचा दिया है।
अंताल्या में दो गोल्ड के बाद विश्व कप फाइनल में भी चमके
धीरज ने इस साल जून में तुर्किये के अंताल्या में विश्व कप स्टेज तीन में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार फॉर्म का संकेत दिया था। अब विश्व कप फाइनल में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में अपनी जगह पक्की कर ली है। विश्व कप फाइनल में भारत के लिए इससे पहले डोला बनर्जी ने 2007 में महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। अब धीरज की ऐतिहासिक जीत से पुरुष वर्ग में भी भारत का तिरंगा सबसे ऊंचा हुआ है।





