भारतीय वायुसेना को मिलेगा नया प्रमुख, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित संभालेंगे कमान; जानिए कैसा रहा उनका सैन्य सफर

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नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित देश के 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे। मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। फिलहाल उप प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे दीक्षित का सैन्य करियर कई अहम परिचालन, प्रशासनिक और तकनीकी भूमिकाओं से जुड़ा रहा है। अपने बैच में वह अकेले ऐसे अधिकारी हैं, जो वायुसेना के शीर्ष पद तक पहुंचे हैं। सरकारी आदेश के मुताबिक, उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।

कौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित?

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारियों में शामिल हैं। उन्हें स्वदेशी रक्षा तकनीक और देश में विकसित लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देने के प्रयासों से भी जोड़ा जाता है। लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एलसीए तेजस समेत अन्य स्वदेशी विमान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका अहम रही है। उनके वायुसेना प्रमुख बनने से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन देने की दिशा में नई उम्मीदें जुड़ी हैं।

दीक्षित का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्हें दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है और वह 20 से ज्यादा प्रकार के विमान उड़ा चुके हैं। उन्होंने परीक्षण पायलट और उड़ान प्रशिक्षक के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

1986 से शुरू हुआ सैन्य सफर, NDA समेत प्रतिष्ठित संस्थानों में ली ट्रेनिंग

एयर मार्शल दीक्षित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विमान संचालन से लेकर लड़ाकू इकाइयों की कमान और वायुसेना की रणनीतिक योजना बनाने तक कई जिम्मेदारियां संभाली हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कमांडिंग ऑफिसर के रूप में नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 विमानों से लैस करने की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में स्थित एक अग्रिम लड़ाकू वायुसेना स्टेशन और दक्षिणी क्षेत्र के एक प्रमुख लड़ाकू प्रशिक्षण केंद्र की कमान भी संभाली।

एयर डिफेंस से लेकर वायुसेना मुख्यालय तक निभाईं अहम जिम्मेदारियां

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर के पद पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने नई दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। इनमें असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे पद शामिल हैं।

इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्हें सैन्य परियोजनाओं, वायुसेना की भविष्य की जरूरतों, परिचालन तैयारियों और आधुनिक तकनीक से जुड़े मामलों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला। यही अनुभव उन्हें वायुसेना के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी निभाई अहम भूमिका

एयर मार्शल दीक्षित ऑपरेशन सिंदूर के समय चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर तैनात थे। इस भूमिका में उनका काम तीनों सेनाओं के बीच समन्वय से जुड़ा था। इसके बाद जुलाई 2026 में उन्हें भारतीय वायुसेना का उप प्रमुख बनाया गया। अब वह वायुसेना की कमान संभालने जा रहे हैं।

वायुसेना के नए प्रमुख को मिल चुके हैं कई बड़े सैन्य सम्मान

देश के प्रति विशिष्ट सेवाओं और सैन्य योगदान के लिए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को कई प्रतिष्ठित सम्मान दिए जा चुके हैं। उन्हें वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

इन सम्मानों के जरिए सैन्य सेवा के दौरान उनके योगदान और जिम्मेदारियों को मान्यता मिली है। अब वायुसेना प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने जा रही है।

31 अक्टूबर को अमर प्रीत सिंह की विदाई, दी जाएगी गार्ड ऑफ ऑनर

मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल का अंतिम दिन 31 अक्टूबर है। उनकी विदाई के लिए अब तक तीन आधिकारिक समारोह आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित समारोह भी शामिल था। उनका अंतिम विदाई समारोह शनिवार को होगा, जिसमें उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।

नए वायुसेना प्रमुख के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

भारतीय वायुसेना की कमान संभालने के बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के सामने बदलते सुरक्षा हालात के बीच युद्धक क्षमता को मजबूत करना, आधुनिक सैन्य तकनीक अपनाना और स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा। इसके साथ ही वायुसेना की परिचालन तैयारियों और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप क्षमता विकसित करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

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