रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ की तैयारी, भारत का नाम भी शामिल; अमेरिकी बिल से बढ़ा दबाव

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नई दिल्ली: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की दिशा में अमेरिका में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े उस विधेयक को आगे बढ़ा दिया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। भारत भी इस संभावित कार्रवाई के दायरे में है। हालांकि, भारत पर अभी 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है और अंतिम फैसला विधेयक की आगे की प्रक्रिया तथा राष्ट्रपति की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

भारत की ओर से विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत की ऊर्जा से जुड़े फैसले राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। भारत ने यह भी कहा है कि वह अमेरिका में इस मामले से जुड़े संबंधित पक्षों के संपर्क में है।

लिंडसे ग्राहम बिल सीनेट से पास

अमेरिका में इस विधेयक को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम दिया गया है। अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में इसे 86-11 के वोट से मंजूरी दी थी। विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। सीनेट के संस्करण में रूस के प्रमुख पांच ऊर्जा खरीदारों को उनके नाम से सूचीबद्ध करने के बजाय खरीद की मात्रा के आधार पर प्रावधान रखा गया था।

विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसकी ऊर्जा आय को लेकर कार्रवाई करना है। प्रस्तावित प्रावधान राष्ट्रपति को ऐसे देशों के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दे सकता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदते हैं।

भारत समेत 10 देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव

प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए एक संशोधन के तहत भारत समेत 10 देशों को संभावित 100% टैरिफ के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सूची में भारत के अलावा चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।

हालांकि, किसी देश का नाम इस प्रस्तावित सूची में होना अपने आप उस देश पर 100% टैरिफ लागू होने का मतलब नहीं है। प्रस्ताव का उद्देश्य संबंधित देशों को संभावित टैरिफ के लिए पात्र बनाना है, जबकि अंतिम कार्रवाई राष्ट्रपति के अधिकार और विधेयक के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगी।

भारत पर क्यों बढ़ा अमेरिकी दबाव

रूस से भारत की तेल खरीद लंबे समय से अमेरिका के लिए चिंता का विषय रही है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि रूस से ऊर्जा खरीद से उसे राजस्व मिलता है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध के बीच किया जा रहा है। इसी वजह से वॉशिंगटन रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

भारत का रुख यह रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद और तेल के स्रोतों से जुड़े फैसले राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदता है और ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना उसकी प्राथमिकता है।

अभी भारत पर 100% टैरिफ तय नहीं

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक को आगे बढ़ा दिया गया है, लेकिन इसे अंतिम रूप मिलने और उसके बाद राष्ट्रपति के स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया अभी बाकी है। इसके अलावा प्रतिनिधि सभा में ऐसे संशोधन भी प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें राष्ट्रपति को व्यापक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार हटाने या सीमित करने की मांग की गई है। इसलिए फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ लगना तय नहीं है।

अमेरिका के फैसले का भारत पर क्या असर पड़ सकता है

अगर भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था रूस से तेल खरीद को लेकर भारत जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच को आर्थिक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में है।

फिलहाल अमेरिकी संसद में विधेयक को लेकर चर्चा और संशोधनों की प्रक्रिया जारी है। भारत की ओर से भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है और ऊर्जा नीति से जुड़े फैसलों को राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर लेने की बात कही गई है।

 

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