राजस्थान HC के कार्यवाहक चीफ जस्टिस पर आरोपों से मचा हड़कंप, CJI सूर्यकांत ने मांगा जवाब; बोले- आरोप साबित होना अभी बाकी

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर न्यायपालिका में मामला चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर जस्टिस शर्मा का राजस्थान हाईकोर्ट से तबादला करने और नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की है। अब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि शिकायतों के संबंध में जस्टिस शर्मा से उनका पक्ष मांगा जा चुका है।

जस्टिस संदीप मेहता ने करीब तीन सप्ताह के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को तीन पत्र भेजे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट से बाहर स्थानांतरित करने के साथ अदालत में नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग की। जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। जस्टिस मेहता ने अपनी शिकायतों पर अब तक कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

जस्टिस शर्मा पर क्या आरोप लगाए गए?

जस्टिस संदीप मेहता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज में कथित कुप्रबंधन और अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है।

शिकायत में जस्टिस शर्मा पर कथित पक्षपात के स्पष्ट सबूत होने का दावा भी किया गया है। इन आरोपों के बाद अब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के स्तर पर जस्टिस शर्मा से जवाब मांगा गया है और मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि जस्टिस संदीप मेहता की ओर से भेजी गई शिकायतों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से जवाब मांगा गया है। उन्होंने साफ किया कि किसी शिकायत पर फैसला सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी न्यायाधीश पर आरोप लगना अपने आप में आरोपों के सही होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित न्यायाधीश को आरोपों पर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है।

‘मामले का फैसला मीडिया में नहीं हो सकता’

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान स्थापित प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। एक न्यायाधीश की ओर से दूसरे न्यायाधीश पर लगाए गए आरोपों का फैसला सार्वजनिक मंच पर करना उचित नहीं है।

उन्होंने संकेत दिया कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने गंभीर हैं, इसका आकलन संबंधित न्यायाधीश का जवाब मिलने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा। फिलहाल जस्टिस शर्मा से जवाब मांगा जाना प्रक्रिया का शुरुआती चरण है।

गंभीर आरोप हुए तो बन सकती है इन-हाउस कमेटी

न्यायपालिका में न्यायाधीशों के खिलाफ गंभीर शिकायतों से निपटने के लिए इन-हाउस प्रक्रिया निर्धारित है। यदि मुख्य न्यायाधीश को संबंधित न्यायाधीश का जवाब संतोषजनक नहीं लगता और आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए जाते हैं, तो आगे की जांच के लिए इन-हाउस कमेटी गठित की जा सकती है।

ऐसे में फिलहाल जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा से जवाब मांगे जाने को उनके खिलाफ कार्रवाई या लगाए गए आरोपों की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। आगे की स्थिति उनके जवाब और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होने वाले आकलन पर निर्भर करेगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत इस समय तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जर्मनी में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जस्टिस संदीप मेहता के पत्र मिलने के बाद जस्टिस शर्मा से उनका पक्ष मांगा जा चुका है।

 

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