यूपी के 22 लाख से ज्यादा कर्मचारियों-पेंशनरों को बड़ी राहत, अब 45 कार्यदिवस में निपटेगा मेडिकल बिल; नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 22 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों में बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब मेडिकल बिल के निस्तारण के लिए महीनों तक कागजी प्रक्रिया में उलझने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन दावा दाखिल होने के बाद भुगतान योग्य राशि की संस्तुति अधिकतम 45 कार्यदिवस में संबंधित विभाग के जनपदीय नोडल अधिकारी को भेजना अनिवार्य होगा। इसमें कार्यालयाध्यक्ष को 15 कार्यदिवस और स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी जांच व देय राशि निर्धारित करने के लिए 30 कार्यदिवस मिलेंगे।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बुधवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। नई व्यवस्था के तहत जनहित स्वास्थ्य पोर्टल को मानव सम्पदा पोर्टल से जोड़ा जाएगा और चिकित्सा प्रतिपूर्ति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी।
स्वीकृत दरों का पोर्टल पर होगा उपलब्ध रिकॉर्ड
अभी चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावों में बिलों का एसजीपीजीआई लखनऊ या एम्स नई दिल्ली की स्वीकृत दरों से भौतिक मिलान किया जाता है। इस प्रक्रिया में दरों को लेकर विसंगतियों के साथ ही भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
नई व्यवस्था में स्वीकृत दरें पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगी और उनके आधार पर देय राशि स्वतः निर्धारित हो जाएगी। हालांकि 45 कार्यदिवस की समयसीमा भुगतान की संस्तुति से संबंधित है। वास्तविक भुगतान संबंधित विभाग की ओर से किया जाएगा।
इलाज के 30 दिन के भीतर देनी होगी सूचना
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी को इलाज शुरू होने के 30 दिन के भीतर अपने विभाग को इसकी सूचना देनी होगी। इलाज पूरा होने के बाद 90 दिन के भीतर चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा दाखिल करना जरूरी होगा।
दावा नागरिक लॉगिन के जरिए ऑनलाइन दाखिल किया जाएगा। ईएचआरएमएस कोड दर्ज करते ही मानव सम्पदा पोर्टल से कर्मचारी की व्यक्तिगत और सेवा संबंधी जानकारी स्वतः भर जाएगी। यदि कोड उपलब्ध या सक्रिय नहीं है तो संबंधित विवरण मैन्युअल रूप से दर्ज करना होगा।
दावा दाखिल करने से पहले मानव सम्पदा पोर्टल पर मेडिकल रिपोर्टिंग अधिकारी का विवरण भी अपडेट करना होगा।
10 मदों में दर्ज होगा चिकित्सा खर्च
चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा 10 अलग-अलग मदों में दर्ज किया जाएगा। इनमें प्रशासनिक शुल्क, कमरे का खर्च, सर्जरी, डायलिसिस, ऑन्कोथेरेपी, फिजियोथेरेपी, जांच, दवाएं, इम्प्लांट और अन्य खर्च शामिल हैं।
यदि किसी खर्च की राशि गलत मद में दर्ज हो जाती है तो स्वास्थ्य विभाग उसे सही मद में स्थानांतरित कर सकेगा। कार्यालयाध्यक्ष को 15 कार्यदिवस के भीतर हस्ताक्षरित अग्रेषण पत्र ऑनलाइन अपलोड करना होगा।
90 दिन की समयसीमा के बाद दाखिल किए गए दावे के लिए विलंब क्षमा की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कार्यालयाध्यक्ष के पास दावा स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार होगा, लेकिन अस्वीकृति की स्थिति में स्पष्ट कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। ईएचआरएमएस के माध्यम से अग्रेषण पत्र सीधे स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगा।
15 दिन में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का निर्देश
शासन ने सभी विभागों को 15 दिन के भीतर चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़ी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के डैशबोर्ड और राज्य स्तरीय कॉल सेंटर के जरिए कर्मचारी अपने दावे की स्थिति जान सकेंगे और जरूरत पड़ने पर तकनीकी सहायता भी प्राप्त कर सकेंगे।
एनआईसी की ओर से मानव सम्पदा पोर्टल पर अग्रेषण पत्र की निगरानी के लिए अलग डैशबोर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इससे चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावों की प्रक्रिया और उनकी प्रगति पर ऑनलाइन नजर रखी जा सकेगी।





