‘मुझे कश्मीर जाना है’… पाकिस्तान समर्थक प्रचार के आरोपों वाले 82 साल के काजी ने मांगी इजाजत, SC ने केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली: अमेरिका में रहने वाले 82 वर्षीय डॉक्टर खालिद जहांगीर काजी ने कश्मीर जाने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। भारतीय मूल के विदेशी नागरिक कार्डधारक काजी अपने रिश्तेदारों की शादी में शामिल होने के लिए कश्मीर जाना चाहते हैं। उन पर भारत सरकार ने पाकिस्तान समर्थक प्रचार करने और कश्मीरी अलगाववादियों के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगाया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
काजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने अदालत में उनकी उम्र और परिवार के सदस्यों की उम्र का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि काजी पहले भी भारत आ चुके हैं और संभव है कि अपने परिवार के साथ कश्मीर में समय बिताने का यह उनका आखिरी मौका हो।
कश्मीर यात्रा के दौरान राजनीति से दूर रहने का आश्वासन
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, काजी के वकील ने अदालत को बताया कि वह लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार हैं कि कश्मीर यात्रा के दौरान किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
OCI कार्ड रद्द करने के फैसले पर भी मामला लंबित
काजी के भारतीय मूल के विदेशी नागरिक कार्ड को रद्द करने के सरकार के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ पहले ही निरस्त कर चुकी है। हालांकि, एकल पीठ के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील लंबित है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने काजी की भारत यात्रा की अनुमति देने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी।
मई 2023 में रद्द हुआ था OCI कार्ड
भारतीय वाणिज्य दूतावास, न्यूयॉर्क ने काजी पर पाकिस्तान समर्थक प्रचार करने का आरोप लगाया था। भारत सरकार ने मई 2023 में उनकी गतिविधियों को देश की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रतिकूल बताते हुए उनका भारतीय मूल के विदेशी नागरिक कार्ड रद्द कर दिया था। इसके साथ ही विदेशी नागरिक कानून के तहत उन्हें काली सूची में भी डाल दिया गया था।
नवंबर 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कार्ड रद्द करने के फैसले को निरस्त करते हुए कहा था कि कार्रवाई से पहले काजी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया था।





