महंगाई और कमजोर रुपये ने बढ़ाई RBI की चिंता, क्या अक्टूबर में बढ़ेगा रेपो रेट? जानें क्या कहते हैं अर्थशास्त्री
नई दिल्ली: महंगाई बढ़ने की आशंका और दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के रुख में बदलाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। 5 से 7 अक्टूबर तक होने वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। अर्थशास्त्रियों के सर्वे के मुताबिक, आरबीआई इस बार रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर सकता है।
25 आधार अंक बढ़ सकता है रेपो रेट
अगर आरबीआई रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी करता है तो फरवरी 2023 के बाद पहली बार यह दर 5.25 फीसदी से ऊपर जाएगी। सर्वे में शामिल 53 अर्थशास्त्रियों में से 29 ने दिसंबर तक एक और 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है।
अगस्त में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो लगातार तीसरे महीने आरबीआई के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर रही। इसी दौरान थोक महंगाई भी बढ़कर 9.92 फीसदी पहुंच गई।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व और जापान के केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी के बाद आरबीआई पर भी दरों को लेकर फैसले का दबाव बढ़ा है।
कमजोर रुपये और विदेशी निवेश की भी चुनौती
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया इस साल करीब 6 फीसदी कमजोर हो चुका है। वहीं, अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी और भारत-अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर कम होने से विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी है।
रुपये में कमजोरी और विदेशी पूंजी के बाहर जाने की स्थिति आरबीआई के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है। ऐसे में अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में महंगाई के साथ मुद्रा बाजार और विदेशी निवेश की स्थिति पर भी नजर रहेगी।
6.5 फीसदी के पार जा सकती है महंगाई
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब 5.65 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसके बाद अक्टूबर और नवंबर में इसके 6.5 फीसदी से ऊपर जाने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, 2027 की शुरुआत में महंगाई के फिर 6 फीसदी से नीचे आने का अनुमान है। ब्रोकरेज ने अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
पिछली पांच बैठकों में क्या हुआ?
आरबीआई ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 5.50 फीसदी से घटाकर 5.25 फीसदी किया था। इसके बाद 2026 में फरवरी, अप्रैल, जून और अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठकों में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया।
अब अक्टूबर की बैठक में महंगाई, रुपये की स्थिति, विदेशी निवेश और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों के बीच आरबीआई के रुख पर बाजार की नजर टिकी हुई है।





