पीएम मोदी ने रखा ‘पावर टू एम्पावर’ का विजन, कहा- ‘असली महत्व शक्ति के मकसद में है’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए “सशक्त बनाने की शक्ति” (Power to Empower) का विचार रखा। उन्होंने जोर दिया कि असली सवाल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि लोगों के फायदे के लिए उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।
टेक्नोलॉजी और ज्ञान को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी, डेटा, ज्ञान और इनोवेशन आज शक्ति के नए स्रोत बनकर उभरे हैं। इन्हें लाखों-करोड़ों लोगों के लिए अवसर पैदा करने में इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा, “सही सवाल यह है: इस शक्ति का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है? क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ कुछ लोगों के लिए फायदेमंद होगी या करोड़ों लोगों के लिए अवसर पैदा करेगी? क्या ज्ञान सिर्फ कुछ लोगों की ताकत बना रहेगा या सभी को सशक्त बनाएगा?”
पहली बार भारत में ब्लूमबर्ग फोरम का आयोजन
पीएम मोदी ने पहली बार भारत में इस फोरम के आयोजन का स्वागत करते हुए कहा, “हर साल इस फोरम में हम अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आदि पर चर्चा करते हैं। पहली बार इसका आयोजन भारत में हो रहा है। मैं मिस्टर ब्लूमबर्ग से कहना चाहूंगा कि उन्होंने सही समय पर सही जगह चुनी है।” फोरम की थीम “अ वर्ल्ड इन प्ले: डिफाइनिंग द न्यू लीवर्स ऑफ पावर” है। इसमें दुनिया के 500 से ज्यादा प्रभावशाली सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के लीडर्स भाग ले रहे हैं।
नियंत्रण से सशक्तिकरण की ओर सोच का बदलाव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस नजरिए के लिए सोच में बदलाव जरूरी है—नियंत्रण के बजाय सशक्तिकरण, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और व्यक्तिगत सफलता के बजाय दूसरों को सफल बनाने को प्राथमिकता। उन्होंने कहा, “इससे एक नई सोच को बढ़ावा मिलता है—सशक्त बनाने की शक्ति। नियंत्रण करने की शक्ति से आगे, सक्षम बनाने की शक्ति। प्रतिस्पर्धा करने की शक्ति से आगे, सहयोग करने की शक्ति। सफल होने की शक्ति से आगे, दूसरों को सफल होने में मदद करने की शक्ति।”
शक्ति की असली कीमत उसके मकसद में
पीएम मोदी ने याद दिलाया कि ज्ञान, धन और शक्ति का इस्तेमाल बड़े मकसद के लिए करना भारत के लिए नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, “शक्ति की असली कीमत उसके मकसद में होती है। जिस किसी के पास भी ज्ञान, धन और शक्ति है, वह उनका इस्तेमाल कैसे करता है, यह बहुत जरूरी है। हमारी हजारों साल पुरानी परंपरा ने हमें यही सिखाया है, और भारत में हमने अपनी गवर्नेंस में इसे करके दिखाया है।”
भारत वैश्विक भविष्य को आकार देने वाला भरोसेमंद पार्टनर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत अपनी यात्रा के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। अब यह सिर्फ निवेश का ठिकाना नहीं, बल्कि ग्लोबल भविष्य को आकार देने वाला भरोसेमंद पार्टनर है। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत दुनिया का सबसे भरोसेमंद ग्रोथ इंजन और संतुलित वैश्विक आर्थिक प्रणाली बनाने के लिए काम कर रहा है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में हो रहा है। इसमें शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को एक ऐसे देश की ऊर्जा महसूस करने का मौका मिलेगा जो नई अर्थव्यवस्था में सिर्फ हिस्सा नहीं ले रहा, बल्कि उसे सक्रिय रूप से आकार भी दे रहा है।





