पाकिस्तान में महंगाई ने बिगाड़ी थाली की तस्वीर, रोटी-चावल से लेकर दूध और मीट तक की खपत घटी; खाद्य असुरक्षा के आंकड़े चौंकाने वाले

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नई दिल्ली: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में महंगाई का असर अब लोगों की रोजमर्रा की थाली पर साफ दिखाई दे रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच परिवार भोजन की मात्रा घटाने के साथ उसकी विविधता में भी कटौती कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार के आंकड़े ही देश में बढ़ती खाद्य असुरक्षा की गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों के दौरान देश के परिवारों में गेहूं, चावल, मीट, दूध और चाय समेत लगभग सभी प्रमुख खाद्य पदार्थों की खपत कम हुई है। यह कमी ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में दर्ज की गई है।

खाद्य असुरक्षा 15.92 फीसदी से बढ़कर 24.35 फीसदी

पाकिस्तान टुडे की रिपोर्ट में पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि देश में मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा वाले परिवारों की हिस्सेदारी 2019 में 15.92 फीसदी थी। वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 24.35 फीसदी हो गया।

इसी अवधि में गंभीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित परिवारों का अनुपात भी दोगुने से ज्यादा बढ़ा है। 2019 में यह हिस्सेदारी 2.37 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर 5.04 फीसदी हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, अब पाकिस्तान में करीब एक चौथाई परिवार किसी न किसी स्तर पर भूख और कुपोषण जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

छोटी रोटियां, कम चावल और मीट से दूरी

बढ़ते खाद्य संकट का असर परिवारों की रोजाना की भोजन व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। पहले के मुकाबले कम मात्रा में चावल पकाए जा रहे हैं और रोटियों का आकार भी छोटा किया जा रहा है। महंगे मीट की खपत में कमी आई है, जबकि बच्चों को दिए जाने वाले दूध की मात्रा तक घटाई जा रही है।

चाय जैसी नियमित जरूरत की वस्तुओं की खपत में भी कमी दर्ज की गई है। खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच परिवारों के सामने अपनी जरूरत और सीमित खरीद क्षमता के बीच लगातार संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

कम भोजन के साथ पोषण पर भी बढ़ा संकट

रिपोर्ट में इस स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है कि भोजन की मात्रा घटने के साथ उसकी गुणवत्ता में आने वाली गिरावट का असर आने वाले वर्षों में गंभीर हो सकता है। बच्चों और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य तथा पोषण पर इसका खास प्रभाव पड़ने की आशंका है।

खाद्य असुरक्षा का अर्थ केवल इतना नहीं है कि लोगों को कम भोजन मिल रहा है। इसका एक बड़ा पहलू पौष्टिक और संतुलित आहार तक पहुंच का कमजोर होना भी है। इससे परिवारों की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कृषि प्रधान पाकिस्तान में बढ़ा खाद्य आयात

पाकिस्तान को कृषि प्रधान देश माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कम से कम 2021 से खाद्य पदार्थों का शुद्ध आयातक बना हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य संकट की चुनौती अधिक गंभीर बताई गई है। हालांकि, महंगे भोजन और लोगों की घटती क्रय शक्ति का असर शहरों में रहने वाले परिवारों पर भी बढ़ रहा है।

सरकारी आंकड़ों ने बढ़ती परेशानी की तस्वीर दिखाई

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़े देश के आर्थिक संकट के उस असर को सामने ला रहे हैं, जो सीधे परिवारों की थाली तक पहुंच चुका है। महंगाई के बीच भोजन की मात्रा कम होने के साथ पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

खाद्य असुरक्षा में लगातार बढ़ोतरी और प्रमुख खाद्य पदार्थों की घटती खपत पाकिस्तान के सामने मौजूद आर्थिक चुनौती के गंभीर मानवीय पक्ष को उजागर करती है।

 

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