ट्रंप ने पावर ग्रिड की सुरक्षा पर लिया बड़ा फैसला, उछले भारतीय कंपनियों के शेयर, जानिए क्या है पूरा मामला

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक बड़े फैसले के बाद भारतीय बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बिजली ग्रिड में कुछ विदेशी निर्मित उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक और उनकी खरीद को सुरक्षा जांच के दायरे में लाने की खबर के बीच निवेशकों का रुझान भारतीय कंपनियों की ओर बढ़ा। सीजी पावर, जीई वर्नोवा, हिताची एनर्जी इंडिया और ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली अन्य कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।

इन कंपनियों के शेयरों में दिखी तेजी

सीजी पावर का शेयर 898.75 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि इसका पिछला बंद भाव 867 रुपये था। इस तरह शेयर में करीब 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

जीई वर्नोवा का शेयर कारोबार के दौरान 4,535 रुपये तक पहुंच गया। इसका पिछला बंद भाव 4,341.50 रुपये था। वहीं हिताची एनर्जी इंडिया का शेयर 33,199.95 रुपये के पिछले बंद भाव से बढ़कर कारोबार के दौरान 34,248.45 रुपये के ऊपरी स्तर तक पहुंच गया।

ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया के शेयर में भी तेजी देखने को मिली। इसका पिछला बंद भाव 303.85 रुपये था, जो कारोबार के दौरान बढ़कर 313.35 रुपये तक पहुंच गया।

क्या है ट्रंप प्रशासन का फैसला?

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका के बिजली ग्रिड की सुरक्षा को लेकर एक कार्यकारी आदेश जारी किया। इसके तहत अमेरिकी बिजली ग्रिड में इस्तेमाल होने वाले कुछ विदेशी निर्मित उपकरणों पर रोक लगाने और उनकी खरीद तथा इस्तेमाल को सुरक्षा जांच के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।

अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए विदेशी उपकरणों से पैदा होने वाले साइबर और परिचालन जोखिमों पर चिंता जताई है। हालांकि आदेश में सभी चीनी उपकरणों पर सीधे प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई है। इसके बजाय उन विदेशी कंपनियों और उपकरणों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित जोखिम माना जा सकता है।

किन बिजली उपकरणों पर रहेगा फोकस?

इस आदेश का दायरा काफी व्यापक बताया गया है। इसमें बड़े सबस्टेशन ट्रांसफॉर्मर, बिजली ग्रिड से जुड़े इनवर्टर, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, बड़े जनरेटर, उच्च वोल्टेज सर्किट ब्रेकर, सुरक्षा प्रणाली, मीटरिंग उपकरण और औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली जैसे उपकरण शामिल हैं।

इन उपकरणों से जुड़े सॉफ्टवेयर और दूर से पहुंच की सुविधा की भी सुरक्षा जांच की जा सकती है। अमेरिका का उद्देश्य बिजली ग्रिड को संभावित साइबर और परिचालन खतरों से सुरक्षित करना है।

भारतीय बिजली उपकरण कंपनियों को कैसे मिल सकता है फायदा?

अमेरिका में विदेशी बिजली उपकरणों की सुरक्षा जांच बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर बन सकते हैं। खासकर अगर सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों के उपकरणों पर और सख्ती होती है तो अमेरिकी बाजार में गैर-चीनी आपूर्तिकर्ताओं की मांग बढ़ सकती है।

ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनियों को ट्रांसफॉर्मर, ग्रिड उपकरण, बिजली इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य बिजली संबंधी उत्पादों के निर्यात में फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है। हालांकि शेयरों में तेजी बाजार की उम्मीदों पर आधारित है और वास्तविक कारोबारी लाभ कंपनी की ऑर्डर बुक, निर्यात क्षमता और अमेरिकी बाजार में उसकी पहुंच पर निर्भर करेगा।

 

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