आज से लागू हुई VB-G RAM G योजना! ग्रामीण मजदूरों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी, बढ़ी मजदूरी दर
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ यानी VB-G RAM G Act को 1 जुलाई 2026 से लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण मजदूरों को रोजगार और मजदूरी दोनों मोर्चों पर बड़ी राहत देने का दावा किया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी कर दी, जो देश के सभी 34 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और निर्धारित मजदूरी क्षेत्रों में लागू हो गई है।
नई अधिसूचना के अनुसार देश में औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। यानी मजदूरों को औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन अधिक मिलेंगे।
अब 100 नहीं, 125 दिन रोजगार की कानूनी गारंटी
नई योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इससे पहले मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी उपलब्ध थी। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई अवधि ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका सुरक्षा को मजबूत करेगी।
300 रुपये प्रतिदिन तय की गई न्यूनतम मजदूरी
सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की है। इसका मतलब है कि योजना के अंतर्गत देश के किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। केंद्र का दावा है कि नई व्यवस्था के तहत औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की मजदूरी वृद्धि की गई है।
इन राज्यों में मजदूरी दरों में हुआ बड़ा इजाफा
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को सीधे 300 रुपये प्रतिदिन तक बढ़ा दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।
सबसे अधिक बढ़ोतरी अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में दर्ज की गई है, जहां मजदूरी दरों में करीब 24.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक थी, वहां भी नई दरें लागू की गई हैं। अधिसूचना के मुताबिक हरियाणा में मजदूरी 409 रुपये प्रतिदिन, गोवा में 406 रुपये प्रतिदिन, केरल में 401 रुपये प्रतिदिन और सिक्किम के ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्रों में 450 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है।
95 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि आवंटित
नई योजना के प्रभावी संचालन के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की है। सरकार का कहना है कि इससे मजदूरी भुगतान समय पर सुनिश्चित होगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया ऐतिहासिक फैसला
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर रोजगार से वंचित न रहे। उनके अनुसार यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा और गांवों की आर्थिक मजबूती तथा आजीविका सुरक्षा को नया आधार प्रदान करेगा।
पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे वैध
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। नई योजना में ग्राम पंचायतों की भूमिका पहले की तरह महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि विकास, ग्रामीण आधारभूत ढांचे के निर्माण और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
नई योजना पर विपक्ष ने उठाए सवाल
नई व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल भी खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इससे मांग आधारित रोजगार व्यवस्था, पंचायतों की भूमिका और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि केंद्र सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि नया कानून ग्रामीण रोजगार को अधिक प्रभावी बनाएगा, आजीविका के अवसर बढ़ाएगा और बेहतर परिसंपत्तियों के निर्माण में मदद करेगा।
सरकार 2 जुलाई को मुक्कावरिपल्ली गांव में इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ करेगी। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना से जुड़ी जागरूकता सामग्री भी जारी की जाएगी।





