सेमीकंडक्टर फैक्टरी लगाना होगा आसान, जापान दौरे पर पीयूष गोयल की बड़ी घोषणाएं; निवेश से लेकर रोजगार तक पर बड़ा प्लान
नई दिल्ली: जापानी कंपनियों के लिए भारत में सेमीकंडक्टर और अन्य हाईटेक कारखाने स्थापित करना अब आसान बनाने की तैयारी है। विदेश से आयात होने वाली विशेष मशीनों और उपकरणों पर जहां भारतीय मानक ब्यूरो के मानक लागू हैं, वहां प्रमाणन में लगने वाले समय को कम करने के लिए सरकार नया ढांचा तैयार कर रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में जापानी उद्योगपतियों के साथ बातचीत के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को इस दिशा में काम शुरू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
प्रमाणन प्रक्रिया में मिलेगी राहत
प्रस्तावित व्यवस्था में उद्योग, कंपनी, उत्पाद या किसी विशेष परियोजना के आधार पर छूट देने का विकल्प रखा जाएगा। इसका उद्देश्य उन मशीनों और उपकरणों की मंजूरी में लगने वाला समय घटाना है, जिनकी आपूर्ति से सेमीकंडक्टर संयंत्र जैसी बड़ी परियोजनाओं की पूरी समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
समय बचा तो लागत भी घटेगी
सेमीकंडक्टर संयंत्रों में अरबों डॉलर का निवेश होता है और मशीनें एक निर्धारित क्रम में पहुंचती हैं। ऐसे में किसी एक जरूरी मशीन की मंजूरी या आपूर्ति में देरी होने पर पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है और उत्पादन शुरू होने की तारीख आगे बढ़ सकती है। समय पर संयंत्र शुरू होने से निर्माण चरण में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और बाद में इंजीनियरों तथा तकनीकी कर्मचारियों के लिए भी नौकरियां उपलब्ध होंगी। इसके साथ भारत में चिप का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
2032 तक 150 अरब डॉलर की हो सकती है मांग
भारत में सेमीकंडक्टर की मांग वर्ष 2032 तक करीब 150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इससे भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख सेमीकंडक्टर बाजारों में शामिल हो सकता है। इसी को देखते हुए सरकार जापान को केवल निवेश के स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर की पूरी आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रही है।
मशीनरी और उपकरण निर्माण को भी मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित छूट का फायदा केवल तैयार सेमीकंडक्टर उत्पादों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। इससे भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी, उपकरण, सामग्री और जरूरी कलपुर्जों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे देश में इस क्षेत्र का व्यापक औद्योगिक ढांचा तैयार करने में मदद मिल सकती है और भारत की कारोबारी साख मजबूत होने की उम्मीद है।
सेमीकॉन मिशन के तहत बड़े निवेश को रफ्तार
सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन 1.0 और सेमीकॉन 2.0 के तहत प्रोत्साहन दे रही है। सेमीकॉन 1.0 के तहत अब तक 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है। इनमें माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। वहीं, सेमीकॉन 2.0 के लिए सरकार ने करीब 1.275 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय तय किया है।
गुजरात में जापानी कर्मचारियों के लिए स्कूल, अस्पताल और आवास का भरोसा
पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश के साथ बेहतर सामाजिक माहौल उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात में काम करने वाले जापानी कर्मचारियों को घर से दूर होने का अहसास नहीं होना चाहिए। इसके लिए धोलेरा और साणंद के आसपास स्कूल, आवास और अस्पताल विकसित करने की बात कही गई। गोल्फ कोर्स का जिक्र होने पर कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा। गोयल ने कहा कि उद्देश्य जापानी कर्मचारियों के लिए भारत में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां वे सहज महसूस कर सकें।
भारत-जापान मिलकर अफ्रीकी बाजारों में बढ़ाएंगे पहुंच
भारत और जापान अब अपने आर्थिक सहयोग को द्विपक्षीय व्यापार से आगे बढ़ाकर अफ्रीकी बाजारों तक ले जाने की तैयारी में हैं। दोनों देश दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य अफ्रीकी देशों में संयुक्त निवेश और निर्यात की संभावनाएं तलाशेंगे। फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका ने जापानी उद्योग जगत के साथ हुई बैठकों के बाद महत्वपूर्ण खनिजों को दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख क्षेत्र बताया। उनके अनुसार जापान की अनुसंधान एवं विकास क्षमता मजबूत है और दोनों देश इसका इस्तेमाल अफ्रीका में संयुक्त निवेश बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति कुछ ही देशों तक सीमित होने के कारण इस क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
चीनी निवेश को लेकर सतर्कता पर जोर
चीनी निवेश के सवाल पर अनंत गोयनका ने कहा कि दुनिया के कई देशों ने चीनी उत्पादों के बड़े पैमाने पर प्रवेश का अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में निवेश के नियम और सब्सिडी की व्यवस्था समान नहीं है, इसलिए निवेश पर उचित निगरानी जरूरी है। उन्होंने व्यापक आर्थिक स्तर पर चीन से आने वाले निवेश के मामले में भारत की सुरक्षा जरूरतों पर भी जोर दिया।





