सीएम योगी के रडार पर अब 7 एसडीएम, दाखिल खारिज-पैमाइश में लापरवाही पर मांगा जवाब; पहले 10 तहसीलदार हो चुके हैं निलंबित

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लखनऊ: दाखिल खारिज, वरासत, पैमाइश और जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में लापरवाही और देरी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। एक सप्ताह के भीतर 10 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निलंबित किए जाने तथा 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अब सात एसडीएम भी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर राजस्व परिषद ने राजस्व कोर्ट कंप्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों के आधार पर खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को चिह्नित किया है। इनमें लखनऊ की सरोजनीनगर और सदर तहसील के एसडीएम भी शामिल हैं। चिह्नित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

सरोजनीनगर एसडीएम की निस्तारण दर सिर्फ 4.07 फीसदी

समीक्षा में सरोजनीनगर की एसडीएम (न्यायिक) का प्रदर्शन सबसे खराब पाया गया। 22 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 के बीच उनके न्यायालय में 221 मामले दर्ज हुए, लेकिन सिर्फ 9 मामलों का निस्तारण हो सका। इस तरह मामलों के निस्तारण की दर महज 4.07 फीसदी रही।

वहीं, सदर तहसील के एसडीएम के न्यायालय में इस अवधि में 1,000 मामले आए, जिनमें 403 मामलों का निस्तारण किया गया। यहां निस्तारण की दर 40.30 फीसदी रही। इसके अलावा मऊ के मधुबन, प्रतापगढ़ के कुंडा और रानीगंज के अधिकारियों का प्रदर्शन भी तय मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।

इन एसडीएम का रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में

मधुबन तहसील के एसडीएम (न्यायिक) ने 276 में से 55 मामलों का निस्तारण किया। प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील के एसडीएम (न्यायिक) ने 297 में से 80 और रानीगंज के एसडीएम (न्यायिक) ने 418 में से 133 वाद निपटाए।

इसके अलावा रानीगंज के एसडीएम ने 558 में से 183 और कुंडा की एसडीएम ने 1,247 में से 511 मामलों का निस्तारण किया। राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों से चिह्नित अधिकारियों का लिखित स्पष्टीकरण लेकर उपलब्ध कराने को कहा है। पूरी रिपोर्ट 23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जानी है।

एक सप्ताह में 10 तहसीलदार और नायब तहसीलदार निलंबित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्व मामलों में लापरवाही और उदासीनता पर लगातार कार्रवाई हो रही है। पिछले एक सप्ताह में 10 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निलंबित किया गया है, जबकि 13 अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

मंगलवार को ही पांच तहसीलदारों को निलंबित किया गया। इनमें हरदोई के संडीला के तहसीलदार अमित यादव, देवरिया के तहसीलदार कृष्ण कुमार मिश्रा, जौनपुर के तहसीलदार सौरभ कुमार, अयोध्या के तत्कालीन नायब तहसीलदार और वर्तमान में गाजीपुर के तहसीलदार रंजन वर्मा तथा प्रतापगढ़ के तहसीलदार अलख शुक्ला शामिल हैं।

एक सितंबर को भी पांच अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई

इससे पहले 1 सितंबर 2026 को चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री की ओर से राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के तहत की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान राजस्व वादों का निर्धारित समय में निस्तारण सुनिश्चित करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

 

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