भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई अहम समझौते, FTA से 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य; नौकरी से व्यापार तक बड़ी डील
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत दौरे पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परिवहन, आवाजाही और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ देशों के बीच हुए व्यापार समझौते से अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
यूरोप के आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता
यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है, जिसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। उन्होंने इसे यूरोप के किसी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला ऐसा समझौता बताया, जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि पर केंद्रित है।
स्विट्जरलैंड के बाजार में भारतीय सामान की पहुंच बढ़ेगी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को नई गति और ऊंचाई देने वाले महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और निवेश को आसान बनाने पर भी सहमति बनी है।
इससे कृषि, दवा, वस्त्र और इंजीनियरिंग सामान के स्विट्जरलैंड को निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष में साझा अनुसंधान
भारत और स्विट्जरलैंड ने स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नई साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई। भारतीय विज्ञान आधारित स्टार्टअप की क्षमता बढ़ाने के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।
भारत-स्विट्जरलैंड की पुरानी दोस्ती का भी जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और स्विट्जरलैंड के संबंधों को पुराना बताते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता की जड़ें कई ऐतिहासिक यात्राओं और संपर्कों से जुड़ी हैं। उन्होंने 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद की स्विस आल्प्स यात्रा और महात्मा गांधी के स्विट्जरलैंड प्रवास का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति गाई पारमेलिन को भारत की तीन विशेष चीजों—गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर—के साथ हाथ से नक्काशी किए गए कश्मीरी अखरोट की लकड़ी के दीवार पैनल भेंट किए।
वैश्विक शांति और जिम्मेदार एआई पर साथ काम
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास जताया। भारत और स्विट्जरलैंड ने वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं दीं। दोनों देशों ने एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
भारत-स्विट्जरलैंड के बीच हुए 5 प्रमुख समझौते
प्रवासन और आवाजाही साझेदारी को लेकर समझौता हुआ है। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है। इसके तहत प्रत्येक यात्रा में छह महीने तक रहने की सुविधा शामिल है। नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट का प्रावधान भी इसमें शामिल है।
युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान को लेकर भी समझौता हुआ। इसका उद्देश्य दोनों देशों के युवा पेशेवरों को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार का अवसर देना है, ताकि वे अपने क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और भाषायी कौशल को विकसित कर सकें। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक देश से हर साल 300 लोगों के आदान-प्रदान का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 500 किया जा सकता है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के जरिए शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपरक वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना और भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी तैयार करना है।
संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच परिवहन प्रौद्योगिकी, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के विकास एवं सहयोग को लेकर समझौता हुआ। इसके तहत सतत अवसंरचना विकास पर जोर दिया गया है। ई-वाहन, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में तकनीक एवं अवसंरचना के विकास के जरिए परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।





