बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं प्लास्टिक के खिलौने और रोजमर्रा की चीजें, वयस्कों से 15 गुना ज्यादा मिले कण
शोध के प्रमुख वैज्ञानिक प्रो. कुरुंथाचालाम कन्नान का कहना है कि वातावरण में पांच मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कण तेजी से बढ़ रहे हैं। घरों में भी प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल बढ़ने के कारण बच्चे इन सूक्ष्म कणों के संपर्क में अधिक आ सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बच्चों के शरीर में प्लास्टिक के सूक्ष्म रेशों की मौजूदगी की पुष्टि की है।
बच्चों के शरीर में पीईटी का स्तर 15 गुना अधिक
शोध के दौरान बच्चों और वयस्कों के शरीर में पॉलीकार्बोनेट (पीसी) और पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी) के स्तर की जांच की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पीसी का स्तर बच्चों और वयस्कों में लगभग समान पाया गया, जबकि पीईटी का स्तर बच्चों में वयस्कों की तुलना में 15 गुना अधिक मिला।
वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों में पीईटी का स्तर बढ़ने की एक वजह प्लास्टिक के खिलौनों का इस्तेमाल और कालीन पर घुटनों के बल चलना हो सकता है। इस दौरान बच्चे प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों और उनसे जुड़े दूषित पदार्थों के संपर्क में आ सकते हैं।
बच्चों के उत्पादों में प्लास्टिक की जगह दूसरी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी
प्रो. कन्नान के मुताबिक, बच्चों के इस्तेमाल के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों में प्लास्टिक के बजाय दूसरी सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे बच्चों को प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने से बचाने में मदद मिल सकती है।
शोधकर्ताओं ने बच्चों के आसपास प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने पर जोर दिया है।
नवजातों, बच्चों और वयस्कों के मल की जांच
वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन छह नवजातों और दस वयस्कों के मल के नमूनों की जांच के आधार पर किया। इसमें तीन ऐसे बच्चों के नमूने भी शामिल थे, जिन्होंने जन्म के बाद पहली बार मल त्याग किया था।
जांच के जरिए बच्चों और वयस्कों के शरीर में पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट और पॉलीकार्बोनेट के स्तर का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, बच्चों के शरीर में प्लास्टिक के कणों की मौजूदगी भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ाती है।
बच्चों के शरीर में प्लास्टिक पहुंचने की वजहें
शोध में बच्चों के प्लास्टिक के संपर्क में आने के कई संभावित कारण बताए गए हैं। इनमें प्लास्टिक से बने खिलौने, दूध की बोतलें, प्लास्टिक के चम्मच, बिस्तर पर बिछाई जाने वाली प्लास्टिक शीट और मुंह में लगाने वाले प्लास्टिक फीडर शामिल हैं।
इसके अलावा, बच्चों के कपड़ों पर मौजूद प्लास्टिक की सजावटी डिजाइन भी संपर्क का एक संभावित स्रोत हो सकती है। बच्चे इन वस्तुओं को छूने के बाद हाथ मुंह में डालते हैं, जिससे प्लास्टिक के कण उनके शरीर में पहुंच सकते हैं।





