नोबेल शांति पुरस्कार 2026: भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला सम्मान, 11.66 करोड़ रुपये की मिलेगी इनामी राशि

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नई दिल्ली: भारतीय मूल की नवनेथम नावी पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है। दक्षिण अफ्रीका की पूर्व न्यायाधीश और वकील नावी पिल्लई को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस सम्मान के लिए चुना गया है। वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में पहली गैर-श्वेत महिला न्यायाधीश भी रही हैं।

शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए मिला सम्मान

नोबेल समिति ने नावी पिल्लई के योगदान को असाधारण बताया है। वकील के रूप में उनके शुरुआती संघर्ष से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मामलों में न्यायाधीश के तौर पर निभाई गई भूमिका तक, उनके काम में न्याय और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उन्होंने नेल्सन मंडेला और रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई अन्य लोगों का कानूनी बचाव किया था।

नोबेल पुरस्कार के साथ मिलेंगे 11.66 करोड़ रुपये

नावी पिल्लई को पुरस्कार के रूप में 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना की राशि दी जाएगी, जो भारतीय मुद्रा में करीब 11.66 करोड़ रुपये है। उन्हें 10 दिसंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। साहित्य, रसायन विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा के पुरस्कारों के बाद इस सप्ताह घोषित होने वाला यह पांचवां नोबेल पुरस्कार है। वर्ष 2025 में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

भारतीय तमिल परिवार में हुआ था जन्म

नवनेथम नावी पिल्लई का जन्म 23 दिसंबर 1941 को एक भारतीय तमिल परिवार में हुआ था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी। वकील के तौर पर उन्होंने भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और नेल्सन मंडेला समेत कई राजनीतिक बंदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रयास किए।

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं

नावी पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह वर्ष 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रही थीं। शांति, न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए किए गए उनके कार्यों को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

 

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