थायराइड की समस्या से हैं परेशान? खानपान की इन 8 चीजों को लेकर बरतें सावधानी, सेहत पर पड़ सकता है असर

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नई दिल्ली: थायराइड की समस्या आज कई लोगों में देखने को मिल रही है। यह स्थिति थायराइड हार्मोन के असंतुलन से जुड़ी होती है, जिसका असर शरीर के वजन, ऊर्जा और दूसरी शारीरिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। थायराइड की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक पाई जाती है। ऐसे में दवाओं के साथ खानपान पर ध्यान देना भी जरूरी है। हालांकि, हर खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ना आवश्यक नहीं होता। खासकर हाइपोथायराइडिज्म से पीड़ित लोगों को कुछ चीजों के सेवन और दवा लेने के समय को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

थायराइड की समस्या के दो प्रमुख प्रकार

थायराइड से जुड़ी समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। हाइपरथायराइडिज्म में शरीर जरूरत से ज्यादा थायराइड हार्मोन बनाने लगता है, जबकि हाइपोथायराइडिज्म में हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। दोनों स्थितियों में लक्षण और उपचार अलग हो सकते हैं। इसलिए खानपान में बदलाव करने से पहले अपनी स्थिति को समझना जरूरी है।

1. ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी

ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियों में फाइबर और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, इन सब्जियों को बहुत अधिक मात्रा में कच्चा खाने से उन लोगों में थायराइड हार्मोन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिनके शरीर में आयोडीन की कमी है। सामान्य मात्रा में पकाकर इनका सेवन आम तौर पर किया जा सकता है। इन्हें पूरी तरह बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

2. ब्रेड, पास्ता और ग्लूटेन वाले खाद्य पदार्थ

ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाता है। ब्रेड और पास्ता जैसे खाद्य पदार्थों में यह मौजूद हो सकता है। थायराइड की दवा लेने वाले लोगों को दवा के सही अवशोषण के लिए उसके सेवन से जुड़े निर्देशों का पालन करना चाहिए। ग्लूटेन से हर थायराइड मरीज को परेशानी होती है, ऐसा नहीं है। इसे छोड़ने की जरूरत विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर की सलाह पर ही तय करनी चाहिए।

3. अधिक वसा वाले और तले हुए खाद्य पदार्थ

बटर, मेयोनीज, मार्जरीन, अधिक वसा वाला मांस और तली हुई चीजों का ज्यादा सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ वजन बढ़ने और रक्त में वसा के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। थायराइड की समस्या से जूझ रहे लोगों को संतुलित आहार अपनाने और तली-भुनी चीजों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

4. ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ

मिठाइयों, मीठे पेय और अधिक चीनी वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में कैलोरी ज्यादा हो सकती है, जबकि पोषक तत्व कम होते हैं। इनका नियमित और अधिक सेवन वजन बढ़ने समेत दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए थायराइड के मरीजों को चीनी की मात्रा सीमित रखनी चाहिए और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

5. प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ

पैकेटबंद और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। ज्यादा सोडियम लेने से उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ता है। हाइपोथायराइडिज्म से पीड़ित लोगों को भी अपने रक्तचाप और खानपान का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनके पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी जरूर देखें।

6. बीन्स, फलियां और अधिक फाइबर वाला भोजन

बीन्स, फलियां, साबुत अनाज, फल और सब्जियां फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। पर्याप्त फाइबर पाचन के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन अचानक बहुत अधिक मात्रा में फाइबर लेने से कुछ लोगों को पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, अधिक फाइबर वाला भोजन थायराइड हार्मोन की दवा के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दवा और भोजन के बीच उचित अंतर रखने के लिए चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें।

7. कैफीन वाली चाय और कॉफी

चाय और कॉफी में कैफीन पाया जाता है। थायराइड के मरीजों को इसका सेवन अपनी सहनशीलता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सीमित रखना चाहिए। खासतौर पर थायराइड की दवा लेने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से दवा के अवशोषण पर असर पड़ सकता है। दवा लेने और कैफीन वाले पेय पीने के बीच कितना अंतर रखना है, इसके लिए डॉक्टर या दवा के निर्देशों का पालन करें।

8. शराब का सेवन

शराब का अधिक सेवन नींद, ऊर्जा और संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। थायराइड की समस्या वाले लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रहे उपचार को ध्यान में रखते हुए शराब से बचने या इसका सेवन सीमित करने के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। शराब को थायराइड हार्मोन बढ़ाने का सीधा कारण मानना सही नहीं है।

थायराइड में खानपान को लेकर क्या रखें ध्यान?

थायराइड की समस्या होने पर हर व्यक्ति के लिए एक जैसी आहार संबंधी पाबंदियां जरूरी नहीं होतीं। आयोडीन की कमी, दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं और चल रहे उपचार के आधार पर खानपान की जरूरतें अलग हो सकती हैं। दवा नियमित रूप से लें और उसकी मात्रा या समय में बदलाव खुद न करें। किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ने या विशेष आहार अपनाने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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