तेजस Mk1A की राह आसान, इंजन की कमी दूर; 1-2 महीने में वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद

Tejas

नई दिल्ली: स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस Mk1A की भारतीय वायुसेना में शामिल होने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने बताया कि शुरुआत में विमान की डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण इंजन की उपलब्धता थी। अब इंजन मिल चुके हैं और उन्हें विमानों में लगाया जा चुका है। इसके बाद विमानों के गहन परीक्षण किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक 2-3 तकनीकी बिंदुओं की जांच और पुष्टि अभी बाकी है, जिन्हें अगले 1-2 महीने में पूरा किए जाने की उम्मीद है।

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि इन तकनीकी पहलुओं के पूरा होने के बाद तेजस Mk1A को वायुसेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वायुसेना इस स्वदेशी लड़ाकू विमान के शामिल होने का इंतजार कर रही है।

इंजन की कमी बनी थी बड़ी वजह

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की ओर से भी पहले बताया गया था कि तेजस Mk1A कार्यक्रम में इंजन आपूर्ति एक अहम बाधा रही। सितंबर में GE Aerospace ने HAL को 3 और F404-IN20 इंजन भेजे थे, जिसके बाद इस कार्यक्रम के लिए मिले इंजनों की कुल संख्या 10 हो गई थी।

अब उपलब्ध इंजनों को विमानों में लगाया जा चुका है और परीक्षण प्रक्रिया जारी है। वायुसेना का जोर विमान को औपचारिक रूप से शामिल करने से पहले सभी जरूरी तकनीकी मानकों की पूरी जांच पर है।

रडार और हथियार प्रणालियों से जुड़ी जांच अहम

मौजूदा चरण में विमान के कुछ तकनीकी पहलुओं का परीक्षण बाकी है। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें रडार और हथियार प्रणालियों के एकीकरण से जुड़े परीक्षण शामिल हैं। HAL के अनुसार 27 तेजस Mk1A एयरफ्रेम तैयार हो चुके हैं, लेकिन शुरुआती विमानों की डिलीवरी से पहले कुछ तकनीकी मुद्दों को दूर करना जरूरी है।

वायुसेना की ओर से कहा गया है कि शेष तकनीकी बिंदुओं की पुष्टि होने के बाद पहले विमानों को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया में सुरक्षा और परिचालन जरूरतों के अनुरूप परीक्षणों को पूरा करना प्राथमिकता है।

180 तेजस Mk1A का है ऑर्डर

भारतीय वायुसेना ने तेजस Mk1A के लिए कुल 180 विमानों का ऑर्डर दिया है। यह विमान तेजस के शुरुआती संस्करण की तुलना में उन्नत रूप है और इसे वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में शामिल करने की योजना है। मौजूदा परीक्षणों के पूरा होने के बाद इसकी डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है।

HAL के अधिकारियों ने भी तेजस Mk1A की डिलीवरी शुरू करने की दिशा में काम जारी रहने की बात कही है। कंपनी ने पहले कहा था कि विमान से जुड़े शेष सॉफ्टवेयर और एकीकरण संबंधी मुद्दों को परीक्षण के दौरान दूर किया जा रहा है।

अब अंतिम तकनीकी मंजूरी का इंतजार

तेजस Mk1A के लिए इंजन की उपलब्धता से जुड़ी शुरुआती समस्या दूर होने के बाद अब मुख्य फोकस अंतिम परीक्षणों और तकनीकी पुष्टि पर है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के मुताबिक 2-3 बिंदु पूरे होने के बाद विमान को वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र