ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी, लेकिन ट्रेड से ताइवान तक कई मुद्दे बरकरार; जानिए 5 बड़ी बातें
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक में दोनों देशों के रिश्तों से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी और भव्य स्वागत का माहौल नजर आया, लेकिन व्यापार, ताइवान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे प्रमुख मामलों पर तत्काल कोई बड़ा समाधान सामने नहीं आया। बैठक से जुड़े पांच प्रमुख पहलुओं से अमेरिका-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति को समझा जा सकता है।
1. व्यापार समझौते को दो महीने का विस्तार
अमेरिका और चीन के बीच पिछले साल के व्यापार युद्ध को खत्म करने वाली व्यापार व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, दोनों देश मौजूदा व्यापार समझौते को दो महीने के लिए बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। यह समझौता नवंबर में समाप्त होने वाला था।
हालांकि, यह विस्तार किसी दीर्घकालिक समाधान का रूप नहीं है। शुल्क, चीन की खरीद, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और तकनीकी प्रतिबंध जैसे जटिल मुद्दों पर अंतिम सहमति के लिए दोनों देशों के बीच आगे भी बातचीत जारी रहेगी। फिलहाल इस फैसले से अमेरिका और चीन को व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मिला है।
2. व्हाइट हाउस में दिखी अमेरिकी सैन्य परंपरा
शी जिनपिंग के दौरे के दौरान व्हाइट हाउस में कई भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में अमेरिकी सैन्य परंपरा और शक्ति प्रदर्शन की झलक भी देखने को मिली।
बुधवार और गुरुवार को आयोजित कार्यक्रमों में त्रिकोणीय टोपियां और विशेष वेशभूषा पहने सैनिकों ने मार्च किया। संगीत के बीच आसमान में लड़ाकू विमानों और बमवर्षक विमानों ने भी उड़ान भरी। एक मौके पर जेट विमानों की आवाज इतनी तेज थी कि राष्ट्रपति ट्रंप भी चौंक गए।
ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस के नए हेलीपैड और ‘मरीन वन’ हेलीकॉप्टर का भी दौरा कराया।
3. ताइवान पर चीन ने अमेरिका से सावधानी बरतने को कहा
ताइवान का मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील विषयों में शामिल है। चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक, शी जिनपिंग ने ट्रंप के साथ बातचीत में ताइवान के मुद्दे को सावधानी से संभालने की उम्मीद जताई।
चीनी पक्ष ने यह भी कहा कि बीजिंग चाहता है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का खुलकर विरोध करे।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने इस मुद्दे पर अपनी मौजूदा नीति में बदलाव नहीं किया है। ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति वहां की सुरक्षा और अमेरिकी कांग्रेस में संभावित विरोध के कारण संवेदनशील बनी हुई है।
4. ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का फिर किया जिक्र
शी जिनपिंग ने बैठक के दौरान एक बार फिर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का उल्लेख किया। यह एक अकादमिक सिद्धांत है, जिसके अनुसार किसी उभरती महाशक्ति और मौजूदा प्रमुख शक्ति के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से टकराव या युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, जिनपिंग ने यह भी कहा कि इस जोखिम से बचा जा सकता है। उनका इस सिद्धांत का उल्लेख करना अमेरिका और चीन के बीच जारी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और संभावित सैन्य टकराव के मुद्दे की अहमियत को दर्शाता है।
5. AI पर दोनों नेताओं की प्राथमिकताएं अलग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के भविष्य को लेकर भी ट्रंप और जिनपिंग की सोच में अंतर दिखाई दिया। ट्रंप AI को ‘सुपर इंटेलिजेंस’ या ‘SI’ कहने पर जोर देते हैं और उनका मानना है कि इस तकनीक पर नए नियंत्रण नहीं लगाए जाने चाहिए।
इसके विपरीत, शी जिनपिंग ने गुरुवार को कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियों के तौर पर अमेरिका और चीन की जिम्मेदारी है कि AI के विकास को नियंत्रित किया जाए।
जिनपिंग के मुताबिक, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI इंसानों के नियंत्रण में रहे और इसका इस्तेमाल मानवता के हित में किया जाए।
टेक जगत के दिग्गजों के बीच हुआ स्टेट डिनर
बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग के सम्मान में व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर का आयोजन किया। इसमें तकनीकी क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। इनमें सुंदर पिचई, सैम ऑल्टमैन और जेनसन हुआंग जैसे नाम शामिल थे।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर गर्मजोशी नजर आई, लेकिन व्यापार, ताइवान, AI और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे अहम मुद्दों पर कई सवाल आगे की बातचीत के लिए बाकी रहे।





