OBC क्रीमी लेयर फैसले पर केंद्र ने मांगी 2 साल की मोहलत, पुरानी और जारी भर्तियों पर असर रोकने की दलील

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नई दिल्ली: OBC क्रीमी लेयर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले को लागू करने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार ने अदालत से दो साल का अतिरिक्त समय मांगा है। केंद्र का कहना है कि फैसले को लागू करते समय पहले से जारी और पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं पर इसका प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए। सरकार ने आग्रह किया है कि फैसले का प्रभाव भविष्य में शुरू होने वाली प्रक्रियाओं पर लागू किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता का वेतन या आय अकेले इस आधार पर किसी व्यक्ति को OBC क्रीमी लेयर के दायरे में रखने का निर्णायक आधार नहीं हो सकती।

फैसले में क्रीमी लेयर तय करने के लिए माता-पिता की आय के साथ उनके पद और सेवा से जुड़ी स्थिति को भी ध्यान में रखने की बात कही गई थी। अदालत ने संबंधित व्यवस्था को 1993 के कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित मानदंडों के संदर्भ में देखने की बात कही थी।

केंद्र ने कहा- मूल फैसले को चुनौती नहीं

केंद्र सरकार की ओर से अदालत के सामने स्पष्ट किया गया कि वह सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले को कमजोर या खत्म करने की मांग नहीं कर रही है। सरकार का अनुरोध केवल फैसले को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय देने से जुड़ा है।

केंद्र के अनुसार, दो साल का समय मिलने से प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने, प्रशासनिक अनिश्चितताओं को दूर करने और नई व्यवस्था को समान रूप से लागू करने में मदद मिल सकती है।

पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर केंद्र की चिंता

सरकार की मुख्य चिंता पहले से चल रही और पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर है। केंद्र का कहना है कि फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने पर पहले से जारी भर्ती प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से उसने फैसले को भविष्य की प्रक्रियाओं पर लागू करने का आग्रह किया है, ताकि मौजूदा भर्तियों में संभावित व्यवधान से बचा जा सके।

अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित हैं याचिकाएं

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग हाई कोर्ट में याचिकाएं विचाराधीन हैं। केंद्र ने इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट या किसी एक हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए भी याचिका दायर की है।

सरकार का प्रयास इन मामलों की सुनवाई को एक जगह लाने का है, ताकि OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मुद्दे पर कानूनी स्थिति को एकरूपता के साथ देखा जा सके।

11 मार्च के फैसले में क्या कहा गया था

11 मार्च 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर निर्धारित करने से जुड़े मानदंडों पर विस्तार से विचार किया था। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता की आय को अकेले निर्णायक आधार नहीं मानने की व्यवस्था सामने आई थी। इसके साथ ही माता-पिता के पद और उनकी सेवा से संबंधित स्थिति को भी निर्धारित मानदंडों के अनुसार ध्यान में रखने की बात कही गई थी।

अब केंद्र की ओर से मांगे गए दो साल के समय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। सरकार की दलील फैसले के कार्यान्वयन, मौजूदा भर्ती प्रक्रियाओं पर संभावित प्रभाव और प्रशासनिक अनिश्चितताओं को दूर करने से संबंधित है।

 

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