ईरान पर ढीले होंगे अमेरिकी प्रतिबंध, तेल कारोबार को मिली राहत; होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर भी बनी सहमति

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वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से जारी संघर्ष के बाद अब दोनों देशों के बीच समझौते का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पक्ष एक अहम समझौते पर सहमत हो गए हैं, जिस पर शुक्रवार को औपचारिक मुहर लग सकती है। हालांकि समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सामने आई जानकारियों के मुताबिक ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से कच्चा तेल और अन्य ईंधन बेचने की अनुमति देने पर सहमति बन गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में वर्ष 2018 के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इन प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ा था और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। अब नई व्यवस्था के तहत ईरान को सीमित शर्तों के साथ तेल निर्यात की छूट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

परमाणु गतिविधियों और होर्मुज को लेकर रखी गईं शर्तें

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों में राहत कुछ निर्धारित शर्तों के आधार पर ही लागू होगी। इनमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को बाधित न करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौते के पालन के आधार पर आगे की राहत तय की जाएगी।

एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में एक तय अवधि के लिए तेल प्रतिबंधों में ढील देने का प्रावधान रखा गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य आर्थिक प्रतिबंधों को भी हटाने पर विचार किया जा सकता है।

ईरान को मिल सकती है अरबों डॉलर की आर्थिक राहत

ऊर्जा और वैश्विक जोखिम से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। जानकारों के अनुसार ईरान के पास बड़ी मात्रा में तेल भंडार मौजूद है, जिसे वैश्विक बाजार में बेचकर वह अरबों डॉलर की आय अर्जित कर सकता है। प्रतिबंधों में ढील मिलने से बैंकिंग, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में भी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर शुरू हो सकेगी सामान्य आवाजाही

समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बताया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखने और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर सहमति बनी है। संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था।

दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में होर्मुज में सामान्य स्थिति बहाल होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

भारत को कैसे होगा फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका-ईरान समझौते का सबसे बड़ा सकारात्मक असर तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है और आगे इसमें और कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से भारत का आयात बिल कम हो सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत पर दबाव घटेगा और महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही भारतीय रिफाइनरियों के लिए भविष्य में ईरानी तेल एक किफायती विकल्प के रूप में फिर उपलब्ध हो सकता है।

 

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