ईरान पर अमेरिका का फिर हमला, एयर डिफेंस सिस्टम मिनटों में तबाह करने का ट्रंप का दावा; शांति के लिए कतर ने पेश किया नया प्रस्ताव

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वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए सीमित सैन्य हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया। ट्रंप ने इस कार्रवाई को मामूली बताते हुए दावा किया कि ईरान ने हाल ही में नया विमानरोधी सुरक्षा तंत्र तैयार किया था, जिसे अमेरिकी सेना ने महज कुछ मिनटों में नष्ट कर दिया।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित क़ेश्म द्वीप के सुजा इलाके में दो धमाकों की आवाज सुनी गई। शुक्रवार शाम फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने कुछ विमानरोधी उपकरण तैयार किए थे, लेकिन अमेरिकी सेना ने उन्हें करीब पांच से 15 मिनट के भीतर तबाह कर दिया।

मध्यावधि चुनाव में हार के बाद अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई

शुक्रवार को ईरान पर किए गए ये हमले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद पहली सैन्य कार्रवाई हैं। मंगलवार को हुए चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा था। इसके पीछे ईरान के साथ जारी युद्ध और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी को भी एक अहम वजह माना जा रहा है।

चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप के बयानों में भी बदलाव देखने को मिला है। एक तरफ उन्होंने ईरान को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी दी, तो दूसरी ओर कई मौकों पर युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेत भी दिए। ऐसे में नए अमेरिकी हमलों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

ईरान के सामने कतर ने रखा नया शांति प्रस्ताव

सैन्य कार्रवाई के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। कतर के अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी विवाद सुलझाने के लिए पेश किए गए नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। इस पूरे मामले में कतर प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

हालांकि, ईरान फिलहाल ट्रंप प्रशासन के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार नहीं है। तेहरान ने बातचीत से पहले कुछ शर्तें रखी हैं और वह चाहता है कि इन मांगों को किसी भी युद्धविराम समझौते में शामिल किया जाए।

ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, जब्त की गई संपत्तियां लौटाना और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा ईरान लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई रोकने के साथ पूरे क्षेत्र में जारी संघर्ष समाप्त करने की मांग भी कर रहा है।

दो दिन के अंतरिम समझौते से बातचीत शुरू कराने की तैयारी

क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, कतर के मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के सामने दो दिन के संभावित अंतरिम समझौते का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली करना और परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत का रास्ता खोलना है।

प्रस्ताव के पहले दिन अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने और ईरान की जब्त संपत्तियों में से कुछ अरब डॉलर जारी करने की बात कही गई है। इसके बदले ईरान उन परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को पहुंचने की अनुमति देगा, जिन्हें अमेरिका और इजरायल ने बमबारी में निशाना बनाया था।

दूसरे दिन ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति देगा। इसके लिए ईरान और ओमान के बीच तैयार किए गए संशोधित समझौते के आधार पर व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

अंतरिम समझौते के बाद परमाणु कार्यक्रम पर होगी बड़ी बातचीत

कतर की ओर से प्रस्तावित यह व्यवस्था अस्थायी होगी। इसके लागू होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक स्तर पर बातचीत शुरू करने की योजना है। इस वार्ता में ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार और उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

फिलहाल ईरान की शर्तों, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और कतर की मध्यस्थता के बीच यह देखना अहम होगा कि दोनों देश अंतरिम समझौते पर सहमत हो पाते हैं या नहीं।

 

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