₹2000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर किसे देना होगा MDR? वित्त मंत्री ने किया बड़ा खुलासा, कांग्रेस पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
नई दिल्ली: संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश होने के बाद यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस इस मामले में भ्रम फैलाने का काम कर रही है।
विधेयक को लेकर चर्चा के बीच यह सवाल उठ रहा था कि यदि 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होता है तो इसका भुगतान कौन करेगा। इस पर वित्त मंत्री ने साफ किया कि यदि एमडीआर लागू किया जाता है तो इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर होगा।
एमडीआर को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि सरकार सभी यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता तैयार कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है तो यह केवल व्यापारियों पर लागू होगा। इसका अंतिम उपभोक्ताओं या ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को भुगतान व्यवस्था के बुनियादी ढांचे, नवाचार और सुरक्षा में अधिक निवेश करने का अवसर मिलेगा, जिसका लाभ यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।
क्या होता है एमडीआर?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क होता है, जिसका भुगतान व्यापारी डिजिटल भुगतान को संसाधित करने के लिए बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य संबंधित संस्थाओं को करते हैं। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बल्कि व्यापारियों से लिया जाता है।
एमडीआर पर अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि एमडीआर को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।
उन्होंने बताया कि इस पर आगे की प्रक्रिया संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बाद ही आगे बढ़ेगी। इस विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन का प्रस्ताव शामिल है।
बड़े व्यापारियों पर हो सकता है फोकस
सरकारी सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं या छोटे व्यापारियों को प्रभावित करना नहीं है। चर्चा मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों, प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों और तय वार्षिक कारोबार सीमा से अधिक वाले कारोबारों पर एमडीआर लागू करने को लेकर है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छोटे मूल्य के यूपीआई ट्रांजैक्शन और व्यक्ति-से-व्यक्ति किए जाने वाले भुगतान प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे से बाहर रह सकते हैं। साथ ही एमडीआर को दोबारा लागू करने को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है।





