TMC के बैंक खातों पर हाई कोर्ट सख्त! फंड फ्रीज़ मामले में मांगा पूरा ब्योरा, 8 जुलाई को होगी अहम सुनवाई
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से लेन-देन पर लगी रोक को लेकर चल रहे विवाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के ममता बनर्जी गुट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित निजी बैंक को तीनों खातों में मौजूद राशि का पूरा विवरण पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही बिधाननगर पुलिस को भी मामले से जुड़े सभी जांच रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी गई है।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने बैंक अधिकारियों को 7 जुलाई तक खातों का विस्तृत ब्यौरा दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी, जहां अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
खाते फ्रीज़ करने की जल्दबाजी पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि शिकायत दर्ज होने के महज एक दिन बाद बैंक ने खातों से डेबिट लेन-देन पर रोक क्यों लगा दी। कोर्ट ने पूछा कि जांच एजेंसी के पास ऐसा कौन-सा प्रारंभिक आधार था, जिसके चलते इतनी त्वरित कार्रवाई की गई।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि याचिका लंबित रहने तक खातों के संचालन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को विशेष अधिकारी नियुक्त करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
पुलिस ने कहा- गबन की कोशिश से जुड़े रिकॉर्ड पेश करेंगे
बिधाननगर पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अंतरिम राहत पर तत्काल निर्णय टालने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के पास ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड हैं, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि धन के दुरुपयोग या गबन की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने अदालत को बताया कि मामले का मुख्य मुद्दा यह है कि पार्टी के दो अलग-अलग गुटों में से बैंक खातों के संचालन का वैध अधिकार किसके पास है।
ममता गुट ने उठाया राजनीतिक अधिकारों का मुद्दा
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि किसी सक्रिय राजनीतिक दल के बैंक खातों को फ्रीज़ कर देना उसके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इससे पार्टी की नियमित गतिविधियां बाधित होती हैं और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में असमान स्थिति पैदा होती है।
सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत अस्पष्ट है और उसके आधार पर की गई कार्रवाई उचित नहीं कही जा सकती। उन्होंने अदालत से खातों पर लगी रोक हटाने और सामान्य लेन-देन की अनुमति देने का अनुरोध किया।
दूसरे गुट ने कहा- नए नेतृत्व को है अधिकार
वहीं शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने याचिका की वैधता पर ही सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि पार्टी की नई राष्ट्रीय समिति का गठन हो चुका है और याचिकाकर्ता पक्ष को खातों पर दावा करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने अदालत को बताया कि शिकायत इस आशंका के आधार पर दर्ज कराई गई थी कि कुछ लोग खातों के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां कर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। पुलिस इसी पहलू की जांच कर रही है।
बागी विधायकों की शिकायत के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, पार्टी के बागी विधायकों ने बैंक खातों में जमा धन के स्रोत और लेन-देन की जांच की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद साइबर अपराध थाने में मामला दर्ज हुआ और बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज़ की कार्रवाई की गई।
अब हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस पूरे विवाद पर सभी की नजरें 8 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां बैंक खातों के संचालन और जांच की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।





