यूपी में न्यायिक कार्यों में नहीं होती देरी: सीएम योगी

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चंदौली। उत्तर प्रदेश में न्यायिक ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए शनिवार को चंदौली में छह जिलों के एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास किया गया। देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया जिलों के लिए प्रस्तावित इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न भेंट किया और सभी न्यायमूर्तियों का अभिनंदन किया।

लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए मजबूत न्यायपालिका जरूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए न्यायपालिका का सशक्त होना अनिवार्य है। आम नागरिक को जितनी सरलता और सहजता से न्याय मिलेगा, उतना ही बेहतर लोकतांत्रिक ढांचा विकसित होगा। इसके लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के पास न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव आता है तो उसे पूरा करने में देरी नहीं की जाती। सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए न्यायिक सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यूपी के लिए ऐतिहासिक दिन, न्यायिक इतिहास में जुड़ेंगे नए स्वर्ण अक्षर

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आज यहां न्यायपालिका के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की पूर्व में कही गई बातों का उल्लेख करते हुए बताया कि एक यात्रा के दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि न्याय को आम नागरिक तक आसानी से पहुंचाने के लिए इंटीग्रेटेड कोर्ट मॉडल विकसित किए जाने चाहिए, जहां एक ही छत के नीचे सभी न्यायिक सुविधाएं उपलब्ध हों। उसी सोच से प्रेरित होकर प्रदेश के छह जनपदों में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। आने वाले कुछ महीनों में चार अन्य जिलों में भी इसी तरह के कोर्ट कॉम्प्लेक्स तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल भारत के न्यायिक इतिहास में नए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगी।

पीएम मोदी की नीतियों से मिली दिशा और प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर बनाने के लिए कई अहम सुधार किए गए। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाएं सरल हुई हैं। प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान मुख्य न्यायाधीश ने भी कोर्ट कॉम्प्लेक्स को इंटीग्रेटेड बनाने पर जोर दिया था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के सकारात्मक सहयोग से यूपी सरकार ने एक साथ उन 10 जिलों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स की स्वीकृति दी, जहां अपने जनपद न्यायालय नहीं थे।

एलएंडटी जैसी संस्थाएं करेंगी निर्माण, मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

सीएम योगी ने बताया कि पहले चरण में चंदौली सहित छह जनपदों के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। डिजाइन स्वीकृत होने के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब एलएंडटी जैसी विश्वविख्यात संस्थाओं द्वारा निर्माण कार्य कराया जाएगा। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे आधुनिक कोर्ट रूम, अधिवक्ताओं के लिए बेहतर चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास, कैंटीन, पार्किंग और खेल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अधिवक्ताओं को जर्जर चैंबर्स में काम नहीं करना पड़ेगा, बल्कि हाईराइज इमारतों में उन्हें आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

हर जिले में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश के हर जनपद में ऐसे आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स हों। फिलहाल छह जिलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा। चंदौली के जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं के लंबे संघर्ष का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि बार एसोसिएशन को लखनऊ बुलाकर इस परियोजना की स्वीकृति की जानकारी दी गई थी। अब उच्च न्यायालय के सहयोग से यह कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा।