जन्म से 100 साल तक बदलता रहता है मस्तिष्क, वैज्ञानिकों ने समझी ब्रेन कनेक्टिविटी की पूरी कहानी

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नई दिल्ली : मानव मस्तिष्क लगातार बदलता रहता है और अब वैज्ञानिकों (Scientists) ने पहली बार इस बदलाव की पूरी यात्रा को मैप करने में सफलता पाई है। करीब 3,500 से अधिक लोगों के ब्रेन स्कैन (Brain Scan) का विश्लेषण कर शोधकर्ताओं ने एक एटलस तैयार किया है, जो जन्म से लेकर 100 साल की उम्र तक मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों के बीच फंक्शनल कनेक्टिविटी यानी तालमेल में होने वाले बदलाव को दिखाता है। अध्ययन से यह भी सामने आया कि युवावस्था में मस्तिष्क के कुछ खास पैटर्न सीधे तौर पर स्मृति, सोचने की गति और संज्ञानात्मक क्षमता से जुड़े होते हैं।

शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क को तीन मुख्य फंक्शनल अक्षों में बांटा है। पहला ‘सेंसरी-टू-एसोसिएशन’ अक्ष, जो साधारण अनुभवों और संवेदनाओं से लेकर जटिल सोच तक की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। दूसरा अक्ष ध्यान, निर्णय और कॉग्निटिव कंट्रोल यानी सोच-समझ पर नजर रखता है। तीसरा अक्ष भावनाओं, आंतरिक सोच और मानसिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। इन तीनों अक्षों के माध्यम से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को तीन स्तरों में समझा जा सकता है – महसूस करना, सोच-समझ और नियंत्रण।

शोध में यह भी पता चला कि सेंसरी-टू-एसोसिएशन अक्ष बचपन और किशोरावस्था में तेजी से विकसित होता है और लगभग 19 साल की उम्र में यह चरम पर पहुँच जाता है। इस समय मस्तिष्क की संरचना अधिक परिपक्व और वयस्क जैसी होती है। वहीं, दूसरा अक्ष जो सोच और मानसिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है, शुरुआती मोटर और मानसिक स्किल्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग उम्र में मस्तिष्क के अलग हिस्सों की कनेक्टिविटी अलग महत्व रखती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के न्यूरोसाइंटिस्ट जैकब साइडलिट्ज़ का कहना है कि यह एटलस न्यूरोडीजेनेरेटिव और विकास संबंधी बीमारियों के शुरुआती संकेत पहचानने में मदद कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अभी व्यक्तिगत स्तर पर मस्तिष्क की कनेक्टिविटी में समय के साथ होने वाले छोटे बदलावों को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण है।