मोबाइल से चिपके रहने की लत हो रही जानलेवा, हर साल 20 हजार बच्चों की जा रही जान, सरकार से कानून बनाने की मांग
नई दिल्ली : हर समय टीवी (TV) या मोबाइल (Mobile) की स्क्रीन से चिपके रहने की लत बच्चों (children) और किशोरों (Teenagers) के लिए जानलेवा साबित हो रही है। हर साल कम से कम 20 हजार बच्चे इसकी वजह से आत्महत्या कर लेते हैं। यह दावा तृणमूल सांसद (TMC MP) डेरेक ओ’ब्रायन ने शुक्रवार को राज्यसभा में किया। साथ ही कहा कि सरकार को इस संकट के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तृणमूल सांसद ने कहा कि विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि बच्चे और युवा हर दिन कम से कम आठ घंटे का समय मोबाइल फोन और स्क्रीन पर बिता रहे हैं, जो साल में 100 दिनों से अधिक के बराबर है। 68 देशों ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। अत्यधिक स्क्रीन समय नींद को बाधित करता है, चिंता के खतरे को बढ़ाता है और मूड में जल्दी बदलाव का कारण बनता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मोबाइल फोन या स्क्रीन के जरूरत के अनुसार उपयोग को बढ़ावा देना, ऑफलाइन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा डिजिटल एडिक्शन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्यापक संवाद शुरू करना शामिल है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन गेम के बढ़ते उपयोग को विनियमित करने के लिए शुक्रवार को सरकार से एक कानून लाने का अनुरोध किया। उन्होंने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आजकल घंटों तक बच्चे रील, वीडियो गेम और स्क्रोलिंग में लगे रहते हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि बच्चों और किशोरों में कम उम्र में ही स्मार्ट फोन की लत लग रही है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इससे जुड़ा एक और गंभीर विषय यह है कि युवाओं के बीच ऑनलाइन सट्टेबाजी का तेजी से प्रसार हो रहा है।
दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एविएटर जैसे खेल में, वर्चुअल विमान से उड़ान भरने के साथ पैसे बढ़ने का लालच दिया जाता है। लूडो जैसे खेलों में भी सट्टेबाजी सामान्य चीज हो गई है। उन्होंने दावा किया कि सट्टा आधारित खेलों का फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट पर खुले आम प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा साइबर बुलिंग के कृत्य और ऑनलाइन उत्पीड़न हो रहे हैं और डाटा की गोपनीयता से जुड़े बहुत गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने उल्लेख किया कि विश्व के कई देशों में इसे लेकर बहुत कड़े नियम बनाए गए हैं।



