मोदी सरकार में रेलवे बना पूर्वोत्तर भारत के विकास की रीढ़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का एक मजबूत इंजन बनकर उभरा है। रेलवे परियोजनाओं के माध्यम से न सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार हुआ है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
रेलवे परिदृश्य में आया निर्णायक बदलाव
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि बीते एक दशक में पश्चिम बंगाल के रेलवे परिदृश्य में स्पष्ट और निर्णायक बदलाव देखने को मिला है। कभी भौगोलिक सीमाओं, जर्जर ढांचे और असमान पहुंच से जूझने वाले ये क्षेत्र अब एकीकृत और भविष्य के अनुरूप रेलवे प्रणाली की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
अमृत भारत स्टेशन योजना बनी परिवर्तन का केंद्र
उन्होंने कहा कि इस बदलाव के केंद्र में अमृत भारत स्टेशन योजना है, जो दुनिया की सबसे बड़ी रेलवे स्टेशन पुनर्विकास योजनाओं में से एक है। यह पहल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में एक नए युग का संकेत देती है। योजना केवल स्टेशनों के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को जनता की जरूरतों के अनुरूप नए सिरे से परिभाषित करने की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है।
1,300 से अधिक स्टेशनों का पुनर्विकास
देशभर में 1,300 से अधिक रेलवे स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। शर्मा के अनुसार, यह योजना ऐसे नेतृत्व को दर्शाती है जो सिर्फ नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि ठोस परिणाम और तेज कार्यान्वयन पर केंद्रित है।
यात्री सुविधाओं और क्षेत्रीय पहचान पर जोर
पुनर्विकास कार्यों में केवल बाहरी सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि आधुनिक यात्री सुविधाएं, दिव्यांगजनों के अनुकूल ढांचा, बेहतर यात्री आवागमन व्यवस्था, उन्नत प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना प्रणाली और स्थानीय विरासत से प्रेरित वास्तुकला को शामिल किया गया है। इससे स्टेशन आधुनिक, सुलभ और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े विकास द्वार बन रहे हैं।
आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में स्टेशन

अमृत भारत स्टेशन योजना को एक व्यापक और भविष्य के लिए तैयार पहल के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को केंद्र में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है। स्टेशनों को जीवंत सार्वजनिक स्थल और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित कर यह योजना क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बना रही है।
पश्चिम बंगाल बना यात्री-केंद्रित आधुनिकीकरण का उदाहरण
पश्चिम बंगाल यात्री-केंद्रित रेलवे आधुनिकीकरण का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। सुरक्षा, सुगम्यता और आवागमन व्यवस्था में किए गए व्यापक सुधारों ने राज्य में रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है।
101 स्टेशनों पर 3,600 करोड़ रुपए का निवेश
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पश्चिम बंगाल में 101 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिस पर करीब 3,600 करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है। इनमें महानगरों के बड़े स्टेशन, सीमावर्ती कस्बे और तीर्थ स्थल शामिल हैं, जिससे संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रमुख स्टेशनों का एकीकृत आधुनिकीकरण
हावड़ा, सियालदह, न्यू जलपाईगुड़ी, खड़गपुर, आसनसोल, बंदेल, मालदा टाउन, सिलीगुड़ी, अलीपुरद्वार, शालीमार और संतरागाछी जैसे प्रमुख स्टेशनों को एकीकृत आधुनिकीकरण दृष्टिकोण के तहत उन्नत किया जा रहा है।
न्यू जलपाईगुड़ी बनेगा पूर्वोत्तर का आधुनिक प्रवेश द्वार
न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन को लगभग 335 करोड़ रुपए की लागत से पूर्वोत्तर भारत के आधुनिक प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां नए टर्मिनल, एयर कॉनकोर्स और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे यह स्टेशन क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का अहम केंद्र बनेगा।

