राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ने अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में लिया भाग
राष्ट्रपति जोआओ मैनुअल गोंसाल्वेस लोरेंसो के निमंत्रण पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लिया। लुआंडा के प्राका दा रिपब्लिका में आयोजित एक रंगारंग समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रपति लोरेंसो के साथ अंगोला की सैन्य और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन देखा। अफ्रीका की अपनी दो देशों की यात्रा के अंतिम चरण में, राष्ट्रपति मुर्मु मंगलवार को बोत्सवाना के गैबोरोन स्थित सर सेरत्से खामा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं। यह किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है।
भारत-बोत्सवाना मैत्री की गहराई को दर्शाते हुए एक विशेष भाव के रूप में, बोत्सवाना के राष्ट्रपति महामहिम एडवोकेट ड्यूमा गिदोन बोको ने हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्हें औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। आपको बता दें, राष्ट्रपति मुर्मु 8 नवंबर, 2025 को अंगोला और बोत्सवाना की अपनी राजकीय यात्रा के पहले चरण में अंगोला के लुआंडा पहुंचीं थी। लुआंडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आगमन पर, राष्ट्रपति का स्वागत अंगोला के विदेश मंत्री टेटे एंटोनियो ने किया था। भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने अफ्रीकी साझेदारों, विशेषकर अंगोला के साथ अपने संबंधों को अत्यंत महत्व देता है। यह साझेदारी समानता, पारस्परिक विश्वास और प्रगति की साझा आकांक्षाओं पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत का जुड़ाव भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (आईएएफएस) के ढांचे के तहत विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत अगले आईएएफएस शिखर सम्मेलन की शीघ्र मेजबानी के लिए उत्सुक है।
वहीं, बोत्सवाना में अपनी यात्रा के दूसरे चरण में राष्ट्रपति मुर्मु बोत्सवाना हैं। वह यहां 13 नवंबर तक रहेंगी। राष्ट्रपति मुर्मु बोत्सवाना के राष्ट्रपति डूमा बोको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इस में व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।

गौरतलब हो, बोत्सवाना ने प्रोजेक्ट चीता पर भारत के साथ सहयोग करने और बोत्सवाना से भारत में चीतों के संभावित स्थानांतरण के लिए अपनी तत्परता का भी संकेत दिया है। यह किसी भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इन दो अफ्रीकी देशों की पहली राजकीय यात्रा है। यह यात्रा इस बात पर जोर देती है कि भारत, अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को गहरा करने तथा वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ साझेदारी को और मजबूत करने को कितना महत्व देता है।

