‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के 11 साल पूरे, पीएम मोदी बोले- बेटियां बना रहीं नए रिकॉर्ड

Jhunjhunu: Prime Minister Narendra Modi interacts with the Beti Bachao Beti Padhao beneficiaries in Jhunjhunu, Rajasthan on March 8, 2018. (Photo: IANS/PIB)

केंद्र सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने गुरुवार को 11 साल पूरे कर लिए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नित-नए रिकॉर्ड बना रही हैं और देश को गौरवान्वित कर रही हैं।

पीएम मोदी ने जताया गर्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “कन्या को लक्ष्मी मानने वाले हमारे देश में 11 साल पहले आज ही के दिन ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत हुई थी। यह बड़े गर्व की बात है कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही हैं।”

सुभाषित के जरिए दिया संदेश

पीएम मोदी ने इस मौके पर एक सुभाषित भी साझा किया। उन्होंने लिखा, “दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्। यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥”

2015 में हुई थी अभियान की शुरुआत

गौरतलब है कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई थी। इसका उद्देश्य लिंग के आधार पर चयन को रोकना, बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करना तथा उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह केंद्र सरकार की शत-प्रतिशत वित्तपोषित योजना है, जिसे देश के सभी जिलों में लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रीय चेतना में बनाई मजबूत पहचान

पिछले 11 वर्षों में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने राष्ट्रीय चेतना में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस पहल के जरिए समुदायों, सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज और मीडिया को बालिकाओं के अधिकारों के समर्थन में एकजुट किया गया है। इस अभियान ने लड़कियों के लिए सहायक और न्यायसंगत वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है।

लिंगानुपात और शिक्षा में दिखा सुधार

इस कार्यक्रम के तहत जन्म के समय महिला-पुरुष अनुपात (एसआरबी) में भी सुधार दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ‘एचआईएमआईएस’ के आंकड़ों के अनुसार, साल 2014-15 में जन्म के समय लिंगानुपात 918 था, जो 2024-25 में बढ़कर 929 हो गया है।

बालिका नामांकन में बढ़ोतरी

शिक्षा मंत्रालय के यूडीआईएसई आंकड़ों के मुताबिक, माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात 75.51% से बढ़कर 78% तक पहुंच गया है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।

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